जानिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (laparoscopy surgery) क्या है?

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तेजी से बदलते इस दौर में हर इलाज संभव होता जा रहा है। इतना ही नहीं मेडिकल ट्रीटमेंट और सर्जरी के लिए नए उपकरण की मदद से इलाज करना डॉक्टरों के लिए थोड़ा आसान हो गया है। यहाँ हम बात कर रहे हैं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बारे में अब आप सोच रहें होंगे की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (laparoscopy surgery) क्या है, इसे कब और क्यों किया जाता है और इसकी प्रक्रिया, परिणाम और लागत कितनी होती है। आपके सारे सवालों के जवाब हम देंगे। यदि आप इस सर्जरी के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं तो यह लेख इसमें आपकी काफी मदद करेगा। आपको बता दें कि लैप्रोस्कोपिक उपकरण का उपयोग आंतरिक अंगों के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत या उन्हें हटाने के लिए भी किया जा सकता है। ओपन सर्जरी के जोखिम से बचने के लिए यह आवश्यक हो सकता है। यह प्रक्रिया आंतरिक भागों को देखने में मदद करती है।

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?

 

लेप्रोस्कोपी सर्जरी (laparoscopy surgery) एक एडवांस प्रक्रिया है, जिसमें आधा इंच से भी छोटे कट की मदद से सर्जरी को पूरा किया जा सकता है। इसमें एक छोटे से कट के जरिए लेप्रोस्कोप और अन्य सर्जिकल उपकरण की मदद से सर्जरी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इन्फेक्शन नहीं होता है और बड़ा जख्म नहीं बनता है। यह ओपन सर्जरी के मुकाबले कई गुना अच्छी होती है। आपको बता दें इस सर्जरी के माध्यम से फेफड़े , किडनी , हर्ट, पित्ताशय, अपेंडिक्स, हर्निया आदि से लेकर बड़ी आंत से जुड़ी समस्याओं का इलाज डॉक्टर आसानी से कर पाते हैं। दरअसल लैप्रोस्कोप वास्तव में एक पतली ट्यूब होती है जिसमें एक प्रकाश स्रोत और उससे जुड़ा एक कैमरा होता है, जो पेट के अंदर की तस्वीरें लेता है। इसकी मदद से डॉक्टर सर्जरी कर पाते हैं।

 

भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की लागत कितनी है?

 

भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की औसत लागत लगभग रु. 32,000से 66,000 के बीच में है। हालांकि, अलग-अलग शहरों और अस्पतालों में कीमत अलग-अलग हो सकती हैं। यदि आप कम लगत में उपचार चाहते हैं तो इसके लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

 

 

महिला के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के प्रकार?

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी मुख्यतः 4 प्रकार की होती है, जो इस प्रकार हैं:

 

1. टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (Total laparoscopic hysterectomy in Hindi): यह लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रमुख प्रकार है, जिसमें गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटा दिया जाता है। टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी मुख्य रूप से तब की जाती है जब अन्य सभी सर्जरी फायदेमंद साबित नहीं होती हैं।

 

2. लेप्रोस्कोपिक मोमेक्टॉमी (Laparoscopic myomectomy in Hindi): मोमेक्टोमी गर्भाशय के रसौली को हटाने के लिए एक शल्य प्रक्रिया है, जो गर्भाशय में होती है। नियोप्लाज्म मुख्य रूप से गर्भाशय के ऊतक में पाए जाने वाले गैर-कैंसर वाले गांठ होते हैं, जो अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनते हैं।

 

3. लेप्रोस्कोपिक ओवेरियन कैस्टेक्टॉमी (Laparoscopic Ovarian Castectomy in Hindi): यह एक अन्य प्रकार की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी है, जो मुख्य रूप से गर्भाशय के सिस्ट को ठीक करने के लिए की जाती है। लेप्रोस्कोपिक डिम्बग्रंथि सिस्टेक्टोमी मुख्य रूप से लैप्रोस्कोप नामक एक उपकरण की मदद से किया जाता है, जिसे उस अंग की आंतरिक तस्वीर देखने के लिए पेट के अंदर डाला जाता है।

 

4. लेप्रोस्कोपिक असिस्टेड वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी (Laparoscopic Assisted Vaginal Hysterectomy in Hindi): जैसा कि नाम से पता चलता है, लेप्रोस्कोपिक असिस्टेड वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी योनि में मौजूद समस्या को ठीक करने के लिए की जाती है।

 

 

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे की जाती है?

 

  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी अस्पताल या एक आउट पेशेंट सर्जिकल सेंटर में कि जाती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान डॉक्टर मरीज को एनेस्थीसिया देता है। जिससे मरीज बेहोश हो जाता है और सर्जरी के दौरान उसे कोई दर्द महसूस नहीं होता है।

 

  • डॉक्टर कुछ मामलों में, स्थानीय संज्ञाहरण का उपयोग क्षेत्र को सुन्न करने के लिए कर सकते है। इससे रोगी सर्जरी के दौरान जाग सकता है लेकिन कोई दर्द महसूस नहीं होता है।

 

  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान, सर्जन रोगी के पेट में एक छोटा चीरा लगाता है, और फिर एक छोटी ट्यूब, जिसे कैनुला कहा जाता है, डाला जाता है। प्रवेशनी का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड गैस पास करके पेट को फुलाने के लिए किया जाता है।

 

  • यह गैस प्रक्रिया के दौरान पेट के अंगों को अधिक स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देती है। सर्जन फिर रोगी के पेट में एक और चीरा लगाता है और लेप्रोस्कोप डालता है। लैप्रोस्कोप में कैमरा पेट के आंतरिक हिस्सों की छवियों को बाहर रखी स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है, जिसे बाद में सर्जन द्वारा देखा जाता है।

 

  • इसके अलावा, अन्य उपकरणों को सम्मिलित करने के लिए चीरे लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, बायोप्सी के लिए ऊतक का नमूना लेना। इसके निदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सभी उपकरण हटा दिए जाते हैं। चीरा को टांके या सर्जिकल टेप से बंद कर दिया जाता है।

 

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्या लाभ हैं?

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक लाभदायक प्रक्रिया है, जिसके मुख्य रूप से 5 लाभ हैं, जो इस प्रकार हैं:

 

  • शरीर पर कम निशान: चूंकि इस सर्जरी के दौरान कम कट लगते हैं, इसलिए यह व्यक्ति के शरीर पर कम निशान छोड़ता है।

 

  • कम दर्द: लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रमुख लाभ यह है कि यह प्रक्रिया कम दर्दनाक होती है क्योंकि यह दूरबीन के माध्यम से की जाती है।

 

  • कम ब्लीडिंग होना: इस सर्जरी के दौरान व्यक्ति को ब्लीडिंग कम होती है, जिससे उसके शरीर से खून की कमी नहीं होती है।

 

  • स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार: कई बीमारियों जैसे हर्निया, नियोप्लाज्म, अल्सर आदि के इलाज के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है।

 

  • जल्दी स्वस्थ होना: चूंकि इस सर्जरी के दौरान कोई दर्द, निशान, रक्तस्राव आदि नहीं होता है, इसलिए व्यक्ति को किसी प्रकार की कमजोरी महसूस नहीं होती है और इस सर्जरी के बाद जल्दी ठीक हो जाता है।

 

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