2019 में “अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस” के लिए क्या है सरकार का लक्ष्य

 

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर को मनाया जाता है, इसको मनाने का उद्देश्य यही है की देश में बालिकाओं के अधिकारों का सरंक्षण करना और विश्व भर में कम होती बालिकाओं की संख्या को बढ़ाने के लिए लोगो को जागरूक करना। साथ ही बालिकाओं को विकास देने वाले अवसरों को बढ़ावा देना। आपको बता दें की इसकी शुरुआत यूनाइटेड नेशन ने 2012 में की थी। दरअसल इसे मनाने के पीछे का एक कारण ये भी है की लड़कियों को लड़को के बराबर समान अधिकार दिया जाए।

 

2019 का लक्ष्य “हर क्षेत्र में लड़कियों के लिए रोज़गार को बढ़ावा देना”

 

देश की राजधानी दिल्ली में सरकार ने बेटियों के जन्म, उनकी पढ़ाई को बढ़ावा देने और पुरुष-महिला लिंगानुपात को ठीक करने के लिए लाडली योजना शुरू की है। वही अगर हम देश के सबसे बड़े राज्य की बात करें तो उत्तर प्रदेश की सरकार ने बेटियों के जन्म प्रोत्साहन के लिए कन्या सुमंगला योजना का शुभ आरंभ कल यानि की 11 अक्टूबर के दिन करेगी। आपको  सरकार ने इसके लिए 1200 करोड़ का बजट रखा है। जबकि केंद्र सरकार ने बालिकाओं को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत 2015 में ही कर दी थी।

 

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास

 

आपको इसके बारे में शायद ही पता होगा की इस अभियान को “क्योंकि मैं एक लड़की हूँ” का नाम दिया गया था और इसे पहली बार गैर सरकारी इंटरनेशनल संगठन द्वारा शुरू किया गया था। इसे विश्व स्तर पर कनाडा सरकार के पास ले जाया गया, जिसके बाद 19 दिसंबर 2011 को संयुक्त राष्ट्र ने 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय विश्व बालिका दिवस की घोषणा की।

 

दरअसल विश्व बालिका दिवस को मद्देनज़र रखते हुए ही साल 2015 में ‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत की गई। जिससे और भी ज्यादा लोगो को जागरूक किया जा सके और ये बताया जा सके की लड़किया लड़को से कम नहीं है, वह भी उतना ही काम कर सकती है जीतना कि लड़के करते है। हालांकि इस दिन की शुरुआत बालिकाओं के अधिकार की रक्षा करने के लिए की गई थी।

 

आज के समय में विश्व स्तर पर लड़कियों की स्तिथि की बात करें तो आज हर जगह लड़किया अपना लोहा मनवा चुकी है, हर क्षेत्र में लड़किया लड़को से ज्यादा सफल रही है और ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जिसमें अभी तक लड़कियों ने कदम न रखा हो।

 

आकड़े क्या कहते है?

 

आपको बता दें की पूरी दुनिया की आबादी सात अरब है, जिसमें से आधी आबादी महिलाओं की है और उसमें से 1.1 अरब आबादी लड़कियों की है। अगर हम आकड़ो की बात करें तो पूरी दुनिया में 75 करोड़ ऐसी लड़कियां है, जिनकी शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है।

 

वही भारत में भी लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार समेत राज्य सराकर भी कई सुविधाए शुरू करने जा रही है और बालिकाओं के लिए नई योजनाए बना रही है। कैसे उनका भविष्य उज्जवल किया जाए, बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा,कौशल, परीक्षण और प्रौद्योगिकी में निवेश कर हर सुविधा उपलब्ध कराने की भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है।


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