किडनी रोग के लक्षण और उपचार

Treatment In India

 

किडनी रोग एक बहुत ही आम समस्‍या है, जो दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है। यह हमारे शरीर का मुख्य अंग होता है, जो शरीर से सारे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है और साथ ही रक्त को भी साफ कर सारे विषाक्त पदार्थों को मूत्र के जरिये शरीर से बाहर निकालती है।

 

आइये विस्तार से जानते किडनी रोग के लक्षण और किन चीजों का परहेज करना चाहिए।

 

 

किडनी रोग के लक्षण

 

 

  • यूरीन में ब्‍लड

 

  • दर्द के साथ बार-बार यूरीन आना

 

 

  • मतली और उल्टी

 

  • बदबूदार यूरीन

 

  • बैठने में परेशानी

 

  • बुखार और ठंड महसूस होना

 

  • किडनी और पेट में सूजन

 

 

महिलाओं में किडनी रोग विफलता के लक्षण

 

 

  • किडनी रोग के लक्षण महिलाओं में धीरे-धीरे नजर आते है। आमतौर पर, महिलाओं में, गुर्दे का संक्रमण दो प्रकार के होते हैं। पहला पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis) और दूसरा ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis)।

 

  • महिलाओं में गुर्दे के लक्षण –  पीठ में लगातार दर्द, लगातार बुखार, ठंड, सुस्तता और पेशाब में वृद्धि जैसे लक्षण दिखाई देते है ।

 

  • इसके अलावा, मतली, उल्टी, भूख की कमी, थकान और कमजोरी, अनियमित नींद के पैटर्न, मानसिक तीखेपन में कमी, लगातार मांसपेशी में दर्द और ऐंठन, लगातार खुजली, सांस की तकलीफ, असामान्य रक्त का अनुभव हो सकता है और पैर की एड़ियों में सूजन की भी समस्या हो सकती है।

 

 

किडनी रोग में सूजन के लक्षण

 

 

  • बुखार

 

  • पेशाब करने में दर्द

 

  • असहनीय और तीव्र दर्द

 

  • जी मिचलाना

 

  • पेशाब में खून आना

 

  • चक्कर आना

 

 

  • शरीर पर लाल चकत्ते

 

  • अधिक थकान लगना

 

  • गर्मी के मौसम में ठंड लगना

 

  • मुंह का स्वाद कसेला होना

 

  • सांसों से बदबू आना

 

  • सूजन और सांस की तकलीफ आदि।

 

किडनी रोग की जांच कैसे होती है

 

 

  • यूरिन टेस्ट – यूरिन टेस्ट के द्वारा किडनी रोग का पता लगाया जा सकता है।

 

  • ब्लड टेस्ट – ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन टेस्ट के द्वारा किडनी सही तरह से काम कर रही है या नहीं इसका पता लगाया जा सकता है।

 

  • इमेजिंग टेस्ट – अल्ट्रासाउंड के द्वारा किडनी के आकार या स्थिति में परिवर्तन के बारे में पता लगाया जा सकता है।

 

  • किडनी बायोप्सी – किडनी का बायोप्सी टेस्ट के जरिये किडनी कितनी खराब हो चुकी है, इस बात का पता लगाया जा जाता है।

 

 

किडनी रोग में परहेज

 

 

  • एनिमल प्रोटीन (Animal protein) में प्यूरीन (Purine) मौजूद होता है, जो किडनी में यूरिक एसिड (Uric acid) में परिवर्तित हो जाता हैं।

 

  • सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे की – डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, चिप्स, फास्ट फूड, जमे हुए भोजन, प्रसंस्कृत पनीर स्लाइस, नमक, प्रसंस्कृत मांस, मसालेदार खाद्य पदार्थ और केचप यह सभी सोडियम सामग्री के साथ पैक खाद्य पदार्थ हैं। इन सबके अत्यधिक सेवन से किडनी खराब हो सकती है।

 

  • किडनी रोगियों को खाद्य पदार्थों में से फास्‍फोरस के सेवन से परहेज करना चाहिए, ताकि जिससे कैल्शियम को बनाए रखने में मदद मिल सकें।

 

  • डॉक्टर के अनुसार किडनी की समस्या होने पर पानी कम मात्रा में ही पीना चाहिये तथा आहार में सोडियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस की मात्रा कम होनी चाहिये।

 

  • घी, तेल, मक्खन और चर्बी वाले आहारों का कम से कम सेवन करना चाहिए।

 

 

 

किडनी रोग से बचने के लिए और किडनी को स्वस्थ रखने के लिए वर्कआउट और एक्सरसाइज करना भी बहुत जरूरी होता है। एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शरीर का वजन कम होता हैं। इससे आपका स्टेमिना बढ़ता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है। इसलिए हर रोज नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए।

 

 

अगर आपको किडनी रोग के लक्षण नजर आ रहे हो, तो इसे नजरअंदाज न करे और तुरंत ही डॉक्टर से सम्पर्क करे।

 


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