रुमेटॉइड अर्थराइटिस क्या है? जाने कारण, लक्षण और बचाव

 

 

रुमेटॉइड अर्थराइटिस

 

 

रुमेटॉइड अर्थराइटिस एक प्रकार की जोड़ों, त्वचा और दिल सम्बन्धी बीमारी है। कुछ परिस्थितियों और मामलो में यह, आँख, रक्त वाहिकाओं और शरीर की अलग-अलग कार्यप्रणाली व्यवस्था को भी नुकसान पहुँचाता है। रुमेटॉइड अर्थराइटिस एक स्वप्रतिरक्षित बीमारी है, जिसमें मुख्य रूप से जोड़ों में सूजन तथा गांठ पड़ने की समस्या उत्पन्न होती है, और शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते है जिससे- आँख, त्वचा, हृदय, फेफड़े और रक्त कोशिकायें भी प्रभावित होती हैं। रुमेटॉइड अर्थराइटिस तब होता जब स्वयं के ऊतकों पर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा आघात किया जाता है। प्रतिरक्षा प्रणाली का कार्य शरीर को संक्रमणों से बचाना होता है। रुमेटॉइड अर्थराइटिस को सामान्य भाषा में गठिया के नाम से भी जाना जाता है। हाँलाकि  इसका इलाज संभव है पर कई मामलो में यह विकलांगता का कारण भी बन जाता है।

 

 

भारत में तक़रीबन 70 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। इसका इलाज यदि बीमारी की शुरुआत में हो जाये तो यह व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। ऐसा देखा गया है की रुमेटॉइड अर्थराइटिस के उपचार में जितनी देरी होती है, यह उतना ही ज्यादा नुकसानदायक होता है। इसीलिए इसके लक्षण दिखायी देने पर जल्दी से जल्दी डॉक्टर से सलाह लें

 

 

रुमेटॉइड अर्थराइटिस होने के कारण

 

 

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रुमेटॉइड अर्थराइटिस होने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। यह अभी शोध का विषय है। फिर भी इस क्षेत्र में काम करने वाले कुछ पेशेवर लोगों का मानना है की यह कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं-

 

 

लिंग: इस क्षेत्र में किये गए शोध में एक बड़ी आश्चर्यजनक बात सामने आयी की गठिया रोग से पीड़ित कुल सँख्या का 60% से अधिक सँख्या महिलाओं की है। पुरुषों में गठिया रोग होने की सम्भावना महिलाओं की अपेक्षा कम होता है।

 

 

आयु: रुमेटॉइड अर्थराइटिस ज्यादा उम्र के वयस्कों में तथा वृद्धों में होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

 

 

आनुवंशिकी कारण: रुमेटॉइड अर्थराइटिस होने के मुख्य कारणों में से एक है। उस व्यक्ति को गठिया होने की सम्भावना ज्यादा होती है, जिसके माता या पिता में से कोई इस रोग से पीड़ित हो या कोई रिश्तेदार जिसे यह रोग हो। हालाँकि इसे बहुत यकीं के साथ नहीं कहा जा सकता पर इसे पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता।

 

 

संकेत और लक्षण

 

 

रुमेटॉइड अर्थराइटिस तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उचित रूप से कार्य न कर रही हो। इसकी शुरुआत शरीर के छोटे जोड़ो (जैसे- हाथ, कलाई और पैर के छोटे जोड़ों) से होती है। यह मुख्य रूप से जोड़ों को सबसे अधिक क्षति पहुँचाता है, पर तक़रीबन एक चौथाई मामलो में यह शरीर के अन्य हिस्सों ( जैसे- हृदय, फेफड़ा, रक्त कोशिकायें, त्वचा इत्यादि) को भी प्रभावित करता है।

 

 

इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं

 

 

जोड़ों में सूजन होना और दर्द होना: जोड़ों में सूजन हो जाना और सूजन के साथ दर्द होना इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं। इसकी शुरुआत छोटे जोड़ों (जैसे- हाथ व पैर के जोड़) में होने से होती है, पर धीरे-धीरे समय बीतने के साथ यह कंधे जैसे बड़े जोड़ों को भी अपनी चपेट में ले लेता है।

 

 

जैसे ही जोड़ों में सूजन होता है, तो उस जोड़ की सख्ती बढ़ने लगती है। सख्ती बढ़ने की वजह से उस जोड़ का हिलना डुलना भयानक दर्द देता है। यह स्थिति व्यक्ति को तब महसूस होता है, जब वह सुबह सोकर उठा हो, या बहुत देर बैठने या निष्क्रिय रहने के बाद कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहा हो। कुछ स्थितियों में यह सूजन इतना भयानक रूप ले लेता है की व्यक्ति को असहनीय पीड़ा होती है, और वह सामान्य कार्य करने में भी खुद को असमर्थ महसूस करता है। कुछ मामलो में जोड़ों की कार्यशीलता कम हो जाती है या वो अपने कार्य करने की क्षमता भी खो देते हैं।

 

 

हृदय और धमनियां: रुमेटॉइड अर्थराइटिस में धमनियों में रुकावट और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में  हृदयावरण और बाएं निलय की विफलता की समस्या भी आती है।

 

 

एनीमिया: एनीमिया, रुमेटॉइड अर्थराइटिस के होने के आम लक्षणों में शामिल है।

 

 

गुर्दों में समस्या होना: इसमें गुर्दों में शिकायत की समस्या हमेशा बनी रहती है।

 

 

बुखार का आना: लगातार कम अंतराल पर बुखार का आना भी रुमेटॉइड अर्थराइटिस के होने का संकेत है।

 

 

थकान महसूस करना: इस बीमारी में इंसान जल्दी थक जाता है। यहां तक की वह अपने दैनिक कार्य भी ठीक से नहीं कर पाता।

 

 

लम्बे समय तक अस्वस्थ रहना: किसी भी व्यक्ति का लम्बे समय तक अस्वस्थ रहना भी रुमेटॉइड अर्थराइटिस के लक्षणों में से एक है।

 

 

भूख का न लगना: रुमेटॉइड अर्थराइटिस में भूख बहुत कम लगती है, जिससे व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है।

 

 

वजन में अप्रत्याशित कमी आना: अचानक से वजन का घट जाना भी रुमेटॉइड अर्थराइटिस का संकेत हो सकता है।

 

 

रुमेटॉइड अर्थराइटिस से प्रभावित होने वाले मुख्य अंग

 

  • त्वचा

 

  • आँख

 

  • गुर्दे

 

  • फेफड़े

 

  • रक्त वाहिकायें

 

  • हृदय

 

 

बचाव एवं उपाय

 

 

शारीरिक व्यायाम करें: जो लोग शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय रहते हैं, उनमे रुमेटॉइड अर्थराइटिस होने की सम्भावना कम होती है रुमेटॉइड अर्थराइटिस होने की स्थिति में या इसके लक्षण दिखने पर डॉक्टर के पास जाये और डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर जरूरी जाँच (जैसे: ब्लड टेस्ट,एक्स-रे) करायें।


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