एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण, कारण और बचाव

 

हर इंसान का व्यक्तित्व ही उसे सबसे अलग बनता है औरएन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर” (Antisocial Personality Disorder) से किसी भी इंसान के व्यक्तित्व के बारे में पता चलता है। एक तरीके से यह उस इंसान के बेहेवियर (Behaviour) को बतात है। जिन लोगों में एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर होता है। ऐसे लोगों का व्‍यवहार सामाजिक तौर पर काफी असामान्‍य होता है।

 

ये लोग किसी भी बात पर आसानी से गुस्‍सा हो जाते हैं और इनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। उनके इस व्यवहार की वजह से ही उनसे बात करना बहुत मुश्किल हो जाता है। क्योंकि वह नॉर्मल सी बातों पर बेतुके जवाब देने लगते है और उनके इस बेहेवियर की वजह से आसपास के लोगो को काफी दिक्कत होने लगती है।

 

क्या है एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिऑर्डर ?

 

“एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर” (Antisocial Personality Disorder) ये एक तरिके का मानसिक विकार है। इसके चलते उस  व्यक्ति का बाहरी जीवन से लगाव बहुत कम होने लगता है और उसका लोगों को देखने का नजरिया बिल्कुल बदला जाता है। इतना ही नहीं ऐसे व्यक्ति का बेहेवियर घर और बाहरी समाज के नियमों और कानूनों के प्रति बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है। जैसे वह हर चीजों में कमी निकालने लगते है और अपनी ही बात को ऊंची रखते है। इसके साथ-साथ व्यक्ति को समाजिक संबंधो में भी बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

 

एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के प्रकार

 

  • क्लस्टर ए (Cluster A) : इसमें रोगी बहुत अजीब और सनकी बर्ताव करता है।

 

  • क्लस्टर बी (Cluster B) : इसमें रोगी सबके सामने नाटकीय बर्ताव करता है और अपने प्रति सबका भावनात्मक व्यवहार देखना पसंद करता है।

 

  • क्लस्टर सी (Cluster C) : इसमें रोगी बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय लेता है और खुद को काफी डरा हुआ महसूस करता है।

 

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एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण

 

  • स्वभाव चिड़चिड़ा होना
  • स्वाभाव में बदलाव होना
  • अन्य लोगो पर निर्भर होना
  • ज्यादा गुस्सा करना
  • अपनी बात पर अड़े रहना
  • अहंकार होना
  • बातों का जवाब ठीक से न देना
  • गैरजिम्मेदार होना
  • खुद के ऊपर कंट्रोल न होना
  • बिना सोचे समझे निर्णय लेना

एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारण

 

बचपन से मिला खराब माहौल : इस बीमारी का एक मुख्य कारण है की बचपन से आपको किस वातावरण में रखा गया है। आपकी देखभाल कैसी हुई है ये इस पर भी निर्भर करता है।

 

तनाव भरा वातावरण : जिन लोगों में एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर होता है। ऐसे लोगों में इस बीमारी का कारण तनाव में रहने की वहज भी होती है। यदि उनके आसपास का माहौल तनाव भरा रहता है तो उन्हें इससे दूर रहना चाहिए।

 

वंशवाद : हालांकि कुछ मामलों में यह मानसिक विकार किसी व्यक्ति के जीन के द्वारा भी उस व्यक्ति में प्रवेश करता है। जैसे यह बीमारी आपके घर में किसी को पहले थी, तो यह आने वाली पीढ़ी में भी देखने को मिल सकती है।

 

एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर से बचाव 

 

मनोचिकित्सक (Psychiatrist) : ऐसा होने पर डॉक्टर आपके बेहेवियर में बदलाव लाने के लिए आपकी मनोदशा, विचार, भावनाओं और व्यवहारों (moods, thoughts, feelings and behaviour) के बारे में पूछताछ करता है। वहीं ये उस व्यक्ति को तनाव से निपटने के लिए कई बातें बताता है।मनोचिकित्सक (Psychiatrist) के सत्र व्यक्तिगत रूप से, समूहों में और यहां तक कि आपके परिवार के साथ भी दिए जा सकते हैं।

 

शराब : इस स्थिति में उस व्यक्ति को शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि शराब पीने के बाद वह पूरी तरह से असंतुलित हो जाते है।

 

बेहेवियर थेरेपी (Behaviour Therapy) : इस थेरेपी के द्वारा डॉक्टर रोगी से बात करते है और उसके बिहेवियर के बारे में जानने की कोशिश करते है।

 

कॉग्नेटिव थेरेपी (Cognitive Therapy): कोगनीटिव थरेपी में व्यक्ति के बिहेवियर के  irrational और negative thoughts में परिवर्तन लाने में जोर दिया जाता है। उसे सकरात्मक विचार अपनाने पर जोर दिया जाता है।

 

क्लाइंट थेरेपी (Client Therapy) : इस थेरेपी में डॉक्टर उस व्यक्ति के लिए एक नए माहोल का निर्माण करता है जहां उसका पूरी तरह से सकारात्मक विकास का निर्माण हो सके, इसके जरिये एन्टीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर, तनाव और नशे की लत से छुटकारा पाया जा सकता है।

 

यह एक तरह का मानसिक विकार है जिसे डॉक्टर की सलाह के बिना ठीक नहीं किया जा सकता। इस स्थिति में डॉक्टर्स खुद उस व्यक्ति से बात करते है और उसके बेहेवियर के बारे में जानने की कोशिश करते है की वह किसी भी चीज को लेकर क्या सोचता है। तब वह जान पते है की किस व्यक्ति के साथ उन्हें कैसा बर्ताव करना होगा।


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