जाने डेंगू बुखार के लक्षण और बचाव के उपाय

Treatment In India

 

 

डेंगू बुखार एक मच्छर जनित उष्णकटिबंधीय बीमारी है जो डेंगू वायरस के कारण होती है। यह ऐसी बीमारी हैं, जो एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। यह बीमारी दुनिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होती है। आमतौर पर संक्रमण के तीन से चौदह दिन बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हो सकते हैं।

 

 

डेंगू बुखार के लक्षणों में गंभीर जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सूजन लिम्फ नोड्स, सिरदर्द, बुखार, थकावट और दाने शामिल हैं। बुखार, दाने और सिरदर्द (“डेंगू ट्रायड”) होना डेंगू बुखार के मुख्य लक्षण है।

 

 

डेंगू बुखार का एक गंभीर रूप, जिसे डेंगू रक्तस्रावी बुखार भी कहा जाता है, गंभीर रक्तस्राव, रक्तचाप में अचानक गिरावट (सदमे) और मृत्यु का कारण बन सकता है।

 

 

कैसे और कब होता है डेंगू बुखार

 

 

डेंगू के मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। डेंगू बुखार मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। डेंगू के मच्छर दिन के समय में ही काटते हैं। डेंगू बुखार ज्यादातर बारिश के मौसम में होता है और उसके बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में भी यह बीमारी सबसे ज्यादा फैलती है, क्योंकि इस मौसम में बारिश की वजह से मच्छर पनपते हैं। और जो डेंगू के मच्छर होते है, वो बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते है।

 

 

यह तीन तरह का होता है –

 

1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार

2. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)

3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

 

 

डेंगू बुखार के लक्षण

 

 

साधारण डेंगू बुखार

 

  • बहुत अधिक ठंड लगना

 

  • अचानक तेज बुखार आना

 

  • सिरदर्द होना

 

 

  • आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना

 

  • कमजोरी लगना

 

  • भूख न लगना

 

  • जी मिचलाना

 

  • गले में दर्द होना

 

  • रैशेज होना

 

  • सूजन ग्रंथियां

 

डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) के लक्षण

 

  • नाक और मसूढ़ों से खून आना

 

  • शौच या उलटी में खून आना

 

  • नीले-काले रंग के चक्क्ते होना

 

 

डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

 

इस बुखार में DHF के लक्षणों के साथ-साथ ‘शॉक’ की अवस्था के भी कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे की –

 

  • बेचैनी होना

 

  • तेज बुखार

 

 

  • डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज धीरे-धीरे अपना होश खोने लगता है

 

डेंगू बुखार होने से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है। जिस वजह से इसमें मौजूद सेल्स के अंदर जो फ्लूइड होता है, वह बाहर निकल जाता है। और साथ ही पेट के अंदर पानी भी जमा हो जाता है, जिस वजह से लंग्स और लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसे नजरअंदाज न करे और बताये गए लक्षणों को ध्यान में रखे और कोई भी समस्या होने पर तुरंत ही डॉक्टर से सलाह ले

 

 

डेंगू बुखार से बचाव के उपाय 

 

 

  • डेंगू के मच्छर कूलर और पानी की टंकी आदि में अधिक पनपता है। जिन जगहों पर पानी के जमा होने की उम्मीद हैं वहां कीटनाशकों का उपयोग करें।

 

  • पूरे कपड़े पहनकर सोये और रात को सोते वक़्त मच्छरदानी लगाकर सोएं।

 

  • मच्छरों से बचने के लिए क्रीम लगाकर रखें।

 

  • साफ-सफाई का ख़ास ख्याल रखें क्योंकि गंदगी में डेंगू के मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है।

 

  • कचरे के डिब्बे को खुला न रखे उसे हमेशा ढककर रखें।

 

  • अगर इसका इलाज सही समय पर नहीं किया गया, तो डेंगू हेमोरेजिक फीवर का रूप ले लेता है। इसलिए इसके शुरूआती लक्षण को पहचान कर इसका इलाज तुरंत ही करा ले।

 

  • खाने में हल्दी का अधिक इस्तेमाल करें। सुबह आधा चम्मच हल्दी पानी के साथ या रात को आधा चम्मच हल्दी एक गिलास दूध के साथ लें।

 

  • विटामिन-सी से भरपूर चीजों का सेवन करें जैसे की – आंवले, संतरे या मौसमी ले सकते हैं। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है।

 

 

डेंगू बुखार होने पर किसी अच्छे फिजिशियन के पास जाना चाहिए। और अगर बच्चों में डेंगू के लक्षण नजर आएं तो उसे तुरंत ही डॉक्टर से सम्पर्क करके उनके पास ले जाएं।

 

 


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