नई दिल्ली 2020 में डेंगू ,मलेरिया और चिकनगुनिया की संख्या में आई कमी

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नई दिल्ली : एक रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में 2020 में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के कम मामले देखे गए हैं। हालांकि, वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया की शहर के अस्पताल में कोविड -19 के प्रकोप के कारण अभी एक स्पष्ट तस्वीर नहीं आई है।

 

साप्ताहिक आधार पर शहर के नगर निगमों में 36 अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले कम सामने आए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कोविड-19 की वजह से ऐसा हो सकता है। लॉकडाउन के दौरान, नागरिक निकायों विभाग (Anti-malaria department) ने मलेरिया साप्ताहिक रिपोर्ट में कमी देखी है।

 

नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में अब तक 40 मलेरिया के मामले देखे गए हैं, जबकि हम 2019 और 2018 की बात करें तो लगभग 75 मामलों में दोगुने थे। इन 36 अस्पतालों में सभी प्रमुख सरकारी अस्पताल और कुछ निजी अस्पताल शामिल हैं। इस सूची में एलएनजेपी, हिंदू राव, एम्स, आरएमएल, सफदरजंग, बाबू जगजीवन राम जैसे अस्पताल शामिल हैं।

 

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बड़े अस्पताल में कोविड के मरीजों का इलाज किया जा रहा है, इसलिए शायद लोग अपने स्थानीय क्लीनिक में जा कर इलाज कराना पसंद कर रहे हैं। आगे उन्होंने कहा की ये शुरुआती दिन हैं और मानसून के अभी कई हफ्ते बाकी हैं। अगर स्पष्ट डेटा नहीं आया तो ये लोगों के लिए एक बड़ा संकट हो सकता है।

 

यदि हम अधिक डेटा कैप्चर करते हैं तो इसमें हमे सही रिपोर्ट मिल सकती है। इसके अलावा अभी कोविड की वजह से स्वास्थ्य विभाग के ज्यादातर लोग डोर-टू-डोर जाकर कोविड के लिए टेस्टिंग करने में लगे हैं

 

निगरानी की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, अधिकारी ने कहा कि प्रहरी अस्पतालों से वेक्टर (vector-borne disease) जनित रोग के मामले कनॉट प्लेस के प्रबंधन सूचना केंद्र (management information centre) और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के अधिकारियों को सूचित किए जाते हैं।

 

एसडीएमसी राजधानी में नोडल रिपोर्टिंग एजेंसी है। पिछले साल, शहर भर में क्लीनिकों के लिए मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रिपोर्टिंग को “खतरनाक बीमारी” घोषित करने के लिए अनिवार्य करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था, लेकिन इसे अभी भी अधिसूचना का इंतजार है। एक अन्य स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “इस तरह की अधिसूचना से डेटा संग्रह की प्रक्रिया में काफी सुधार होगा और अधिकारियों को बेहतर प्रतिक्रिया योजना बनाने में मदद मिलेगी।”

Source: ET Health


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