जाने इंडिया में ऑटिज्म ट्रीटमेंट की कुल लागत और अच्छे हॉस्पिटल।

ऑटिज़्म (Autism) को मेडिकल भाषा में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (Autism Spectrum Disorder) कहते हैं। आटिज्म एक व‍िकास से जुड़ी बीमारी है। जिससे बीमार व्यक्ति का दिमाग अन्य लोगों के दिमाग की तुलना में अलग तरीके से काम करता है। ज‍िसके कारण इनका व्‍यवहार, सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से अलग होती है। जिससे आटिज्म वाले व्यक्ति को बातचीत करने में, पढ़ने-लिखने में और समाज में मेलजोल बनाने में परेशानियां आती हैं।

 

आटिज्म बीमारी कभी जड़ से ख़तम नहीं होती और न ही वर्तमान में इसका कोई कम्‍प्‍लीट इलाज है। यह बीमारी एक व्यक्ति को बचपन से होती हे और व्यक्ति के अंतिम समय तक रहती हे। आटिज्म बीमारी वाले व्यक्ति भी आम व्यक्ति से अलग होते है। आटिज्म एक प्रकार का नहीं, बल्कि कई प्रकार का होता हे जिससे आटिज्‍म के अलग-अलग मरीजों को अलग-अलग लक्षण महसूस हो सकते हैं। वैसे तो इस बीमारी से पीड़ित लोग नौकरी करने, परिवार और दोस्तों के साथ मेल-मिलाप करने के काबिल होते हैं, लेकिन कई बार उन्हें इसके लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती है।

 

जहां कुछ ऑटिस्टिक लोगों को पढ़ने-लिखने में परेशानी होती है तो वहीं ऑटिज्‍म के कुछ मरीज या तो पढ़ने लिखने में बहुत तेज होते हैं या सामान्‍य होते हैं। परिवार, टीचर्स और दोस्‍तों के सहयोग से ये लोग नई स्किल्स (Skills) सीखने के भी काबिल होते हैं और बिना किसी की मदद के काम कर पाते हैं। कुछ (Studies) में ऐसा देखा गया है कि डायग्नोसिस और इंटरवेंशन ट्रीटमेंट सर्विसेज़ से ऑटिस्टिक लोगों को सामाजिक व्यवहार और नयी (Skills) सीखने में मदद मिलती है जिससे, वे अपना जीवन अच्छे तरीके से जी पाते हैं।

 

 

 

आटिज्म के प्रकार।

 

 

आटिज्म के तीन प्रकार होते है –

 

1.ऑटिस्टिक डिसॉर्डर (क्लासिक ऑटिज़्म) (Autism Disorder) – ऑटिस्टिक डिसॉर्डर भी ऑटिज्म के प्रकार में से एक हैं इसमें बच्चे के बात करने का तरीका, भाषा संबंधी अन्य दिक्कतें, सीखने और दूसरे लोगों से बातचीत करने में मुश्किलें हो सकती है। और असामान्य व्यव्हार करना, बोलते समय अटक-अटक कर बोलना, हकलाना जैसी आदतें भी ऑटिस्टिक डिसॉर्डर के लक्षण हो सकते हैं। ऑटिस्टिक डिसॉर्डर वाले कई लोगो को बौद्धिक समस्याएं भी होती है।

 

 

2.एस्पर्गर सिंड्रोम (Asperger’s syndrome) – एस्पर्गर सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे बोलचाल में कम नहीं होते, लेकिन ये बच्चे किसी भी बात का जवाब तब देते है जब उनका मन करता है वरना नहीं। यानी किसी के बोलने से नहीं बोलता उसका जब मन करता है तब बोलता है, लेकिन इन बच्चो में कुछ खास विषयों में रूचि बहुत ज्यादा हो सकती है। हालांकि इन लोगों में मानसिक या सामाजिक व्यवहार से जुड़ी कोई समस्या नहीं होती है।

 

 

3.पर्वेसिव डेव्लपमेंट डिसॉर्डर (Pervasive Developmental Disorder) – आमतौर पर इसे ऑटिज़्म का प्रकार नहीं माना जाता है। इस तरह के ऑटिज्म के बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखा गया है, लेकिन माना जाता है कि ये ऑटिज्म के बाकी प्रकारों से अलग है। इसलिए, इसे इस कैटेगिरी में रखा जाता है। इस तरह का डिसऑर्डर DSM-IV में ठीक से डिफाइन नहीं है।

 

 

 

ऑटिज़्म के लक्षण।

 

 

ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण दो साल या तीन साल के बच्चो में देखने को मिलते है, जो सामान्‍य से लेकर गम्भीर हो सकते हैं। एक साल का बच्चा अगर इशारे या खिलोने दिखने से मुस्कुराता नहीं है तो वो आटिज्म बीमारी का संकेत हो सकता है ऐसे में आटिज्म वाले बच्चो के पेरेंट्स को डॉक्टर से सलाह लेना जरुरी है। ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण बच्चों में अलग-अलग भी हो सकते हैं। ऑटिज्म के ऐसे ही कुछ आम लक्षण हैं।

 

सामाजिक संचार और संपर्क समस्याएं –

 

  • आँखों में ऑंखें डालकर न देखना, नज़रे चुराना
  • किसी चीज़ को लेने के लिए इशारा करना
  • अकेले खेलना पसंद करना
  • बहुत देर में बोलना
  • खिलोने से न खेलना, खिलोने देखने पर मुस्कुराना या रिस्पांस न देना
  • एक-दो शब्द बार-बार बोलना

 

आटिज्म व्यवहार से सम्बंधित लक्षण –

 

  • दूसरे बच्चो से बात न करना
  • लगातार हिलते रहना
  • खुद को नुकसान पहुंचना
  • किसी एक काम को बार-बार करते रहना
  • दूसरे व्यक्ति की बात को न समझना
  • पुरांनी स्किल्स को भूल जाना
  • पैरो के पंजो से चलना

 

 

आटिज्म का इलाज – (Treatment of Autism)

 

 

वैसे तो ऑटिज्म (Autism) एक आजीवन स्थिति है और इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन सही समय पर बच्चो का इलाज करवाने से वो अपने जीवन में सुधार करने और जरुरी चीज़ो को सीखने में मदद मिल सकती है। क्योकि जब बच्चा 16 या 18 महीने का होता है तो उसे व्यवहार से आटिज्म की बीमारी का पता लगाया जा सकता है जिससे उसका इलाज पहले से करवाने से आटिज्म से पीड़ित बच्चो को आगे जीवन जीने में बहुत सहायता मिल सकती है। आटिज्म में इलाज की जगह थेरिपी, बच्चो के साथ अच्छे मौहल और कुछ एंटी-एंग्जायटी दवाइयों से उनकी सहायता की जा सकती है, और भी कई तरीको से चीज़ो को सीखने और (skills) को सीखने की क्षमता और विकास को बढ़ाना संभव है। आटिज्म के तरीके निम्नलिखित है –

 

  • प्ले थेरिपी
  • ऑक्यूपेस्नल थेरिपी
  • स्पीच थेरिपी
  • फिजीकल थेरिपी
  • एंटी-एंग्जायटी दवाइयां (बेचैनी वाले व्यवहार को कंट्रोल करने के लिए)
  • चिड़चिड़ापन, गुस्सा और बार-बार एक जैसा व्यवहार दोहराने आदि से राहत के लिए एंटीसायकोटिक दवाइयां दी जाती हैं।
  • अशांत और बेचेनीभरे व्यवहार से राहत के लिए सेंट्रल नर्वस सिस्टम स्टिमुलैंट्स दवा
  • डिप्रेशन और बार-बार दोहरानेवाले व्यवहार से राहत के लिए एंटीडिप्रेसेंट्स दवा
  • आटिज्म के मरीजों को आराम की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। मालिश और चिकित्सा भी मदद कर सकते है।

 

 

ऑटिज़्म में लाइफस्टाइल – (Lifestyle in Autism)

 

 

ऐसे बच्चे जो ऑटिज़्म से पीड़ित हैं उनके लिए ये लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं:

बच्चे की रोजाना ज़िंदगी में आप ऐसे मदद कर सकते है –

 

1. बच्‍चों के साथ कम्‍युनिकेशन (Communication)

 

  • बच्‍चों के साथ धीरे-धीरे और साफ आवाज़ में बात करें
  • बच्चे से बातचीत करते समय बार-बार बच्चे का नाम बार-बार ले, ताकि बच्चा यह समझ सके कि आप उसी से बात कर रहे हैं।
  • बातचीत करते समय हाथों से इशारे करें और तस्वीरों की मदद भी ले सकते हैं
  • आप किसी स्पीच थेरेपिस्ट की सहायता भी ले सकते हैं

 

2. खाना सिखाएं

 

ऑटिज़्म वाले बच्चें अक्सर खाने-पीने से मना करते हैं और किसी एक ही प्रकार का भोजन खाते हैं। वे बहुत ज्यादा या बहुत कम मात्रा में भी खा सकते हैं। वहीं, उन्हें खाना खाते समय भोजन अटकने या खांसी की समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चे के खाने-पीने से जुड़ी आदतें एक डायरी में लिख कर रखनी चाहिए। ताकि, वे बच्चे की समस्याओं को समझ सकें और उससे बचने के उपाय अपना सकें। इसी तरह बच्चे को अगर खाने में दिक्कत हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।

 

3. जब बच्चे को सोने में परेशानी हो तो:

 

पेरेट्स किसी डायरी में बच्चे के सोने-जागने से जुड़ी आदतों के नोट्स बनाएं और समस्याओं को समझें

  • बच्चे का कमरा शांत और अंधेरे से भरा हो
  • बच्चे के सोने और जागने का समय निश्चित करें।
  • ज़रूरत हो तो बच्चे को ईयरप्लग्स पहनने दें।

 

4. साफ-सफाई का महत्व सिखाएं

 

माता-पिता अपने बच्चों को साफ-सुथरा रहने का महत्व ज़रूर समझाएं। बच्चे को उनकी साफ-सफाई रखना सिखाएं और इसके लिए दिन में समय निश्चित करें ।

 

5. भावनाओं पर काबू रखना सिखाएं

 

कुछ बच्चों में भावनाओं को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और वे अक्सर रो पड़ते हैं। ऐसे बच्चों की मदद करने के लिए माता-पिता ये करें:

 

  • हर बार डायरी में उन बातों या घटनाओं के बारे में लिखें जिसके बाद बच्चे ने रोना शुरू किया हो
  • बच्चे के कमरे से ख़राब लाइट्स और बल्ब हटा दें।
  • बच्चे को मधुर और सूकूनभरा गाना सुनने दें।
  • बच्चे की दिनचर्या में किसी प्रकार के बदलाव करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी दें।

 

 

 

जाने ऑटिज़्म के इलाज का खर्च कितना है।

 

 

अन्य देशों की तुलना में भारत में ऑटिज़्म  के इलाज का खर्च कम है। पहले डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति की जाँच करते हैं उसके बाद वह इलाज का चयन करते हैं। अगर हम इलाज के खर्च की बात करें तो इसके इलाज का खर्च 3.5 लाख और 6.5 लाख तक है। यदि आप इससे सम्बंधित कोई भी जानकारी चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें

 

 

 

आटिज्म के मरीजों के इलाज के लिए अच्छे अस्पताल।

 

autism treatment in India in hindi - GoMedii

 

 

आटिज्म के मरीजों के इलाज के लिए दिल्ली के अच्छे अस्पताल।

 

 

 

आटिज्म के मरीजों के इलाज के लिए गुरुग्राम के अच्छे अस्पताल।

 

 

 

आटिज्म के मरीजों के लिए ग्रेटर नोएडा के अच्छे अस्पताल।

 

  • शारदा अस्पताल ,ग्रेटर नोएडा
  • यथार्थ अस्पताल , ग्रेटर नोएडा
  • बकसन अस्पताल ग्रेटर नोएडा
  • जेआर अस्पताल ,ग्रेटर नोएडा
  • प्रकाश अस्पताल ,ग्रेटर नोएडा
  • शांति अस्पताल , ग्रेटर नोएडा
  • दिव्य अस्पताल , ग्रेटर नोएडा

 

यदि आप इनमें से कोई अस्पताल में इलाज करवाना चाहते हैं तो हमसे व्हाट्सएप (+91 9599004311) पर संपर्क कर सकते हैं।

 

 

यदि आप आटिज्म के मरीजों का इलाज करवाना चाहते हैं, या इससे सम्बंधित किसी भी समस्या का इलाज कराना चाहते हैं, या कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें। इसके अलावा आप प्ले स्टोर (play store) से हमारा ऐप डाउनलोड करके डॉक्टर से डायरेक्ट कंसल्ट कर सकते हैं। आप हमसे व्हाट्सएप (+91 9599004311) पर भी संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आप हमारी सेवाओं के संबंध में हमे connect@gomedii.com पर ईमेल भी कर सकते हैं। हमारी टीम जल्द से जल्द आपसे संपर्क करेगी।

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