बच्चों में नींद की कमी : डॉ रोली मुंशी

जब आप सोना चाहते हैं तब तो आपको नींद आती नहीं है तो ऐसे में आपको चिड़चिड़ाहट होने लगती है। ये समस्या बड़ो के साथ-साथ बच्चों में भी होती है। इस समस्या को अनिद्रा का नाम दिया गया है। जो वयस्कों के साथ-साथ शिशुओं को भी हो सकती है। यही वहज है की कई बार माता-पिता बच्चों की इस समस्या को नहीं समझ पाते हैं। लेकिन आपको बता दें की ये समस्या बच्चों को भी होती है, आइये इसके बारे में जानते है।

 

 

बच्चों में नींद की कमी क्या है?

 

 

बच्चों में नींद की कमी का मतलब वही होता है जो बड़ो में होता है। आज कल बच्चों में नींद की कमी के कारण अनेक है सबसे पहले आता है उनकी अनियमित दिन चर्या, जो बच्चे स्कूल जाते है उन्हें अपने टाइम पर ध्यान देना चाहिए। जब वह देर रात तक नहीं जागेंगे तो सुबह समय पर नहीं उठेंगे। क्योंकि इसकी वजह से ही उन्हें भी नींद से जुड़ी समस्या होने लगती है।

 

 

बच्चों में नींद की कमी के कारण 

 

 

इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल करना

 

आज कल के बच्चे बहुत ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स का इस्तेमाल करते है, जिसकी वजह से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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देर रात तक टीवी देखना

 

कुछ बच्चे टीवी के इतने ज्यादा शौक़ीन होते है की वह देर रात तक टीवी देखते है। जिसकी वजह से उन्हें नींद कम आने लगती है।

 

 

खाना समय पर ना खाना

 

अक्सर ऐसा होता है जब बच्चों को समय पर खाना नहीं मिलता है। जिसकी वजह से उन्हें नींद की समस्या होने लगती है।

 

 

दिन में ज्यादा देर तक सोना

 

कुछ बच्चो की आदत होती है स्कूल से आने के बाद वह सो जाते है जिसकी वजह से उन्हें रात में नींद नहीं आती है।

 

 

बहुत ज्यादा खाने का सेवन

 

ऐसा बहुत कम बच्चों में देखा गया है की जब वो कुछ ज्यादा खाना खा लेते है,  तो उन्हें नींद नहीं आती है।

 

 

 

अपने आप नींद खुलना

 

 

बच्चों की नींद रात में तब खुल जाती है जब वह रात में कोई सपना देख लेते है। नींद एक ऐसी समस्या है जिससे वयस्क और बच्चे दोनों ही परेशान है यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमारी है। नींद की कमी बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इससे उनके सामान्य विकास पर भी असर पड़ता है। यदि उनमें ये समस्या लगातार बनी रहती है तो ये उनके पूरे स्वास्थ पर बुरा असर डालती है।

 

 

बच्चों में नींद की कमी के लक्षण  

 

 

नींद आना : रात में लेटने के बाद भी नींद नहीं आना।

 

 

आँखों के नीचे काले धब्बे होना : ये लक्षण वयस्कों में भी देखने को मिलते है और बच्चों में भी देखे जाते है।

 

 

किसी काम में ध्यान ना लगना : बच्चों को सामान्य काम करने में भी ध्यान लगाने में दिक्कत होना जैसे पढ़ाई करना या खेलना आदि।

 

 

बहुत ज्यादा थकान रहना : यदि किसी बच्चे में बहुत ज्यादा थकन रहती है, तो उसे नींद से जुड़ी समस्या होती है। क्योंकि इसकी वजह से ही बच्चे के शरीर में थकान बनी रहती है।

 

 

सुबह नींद नहीं खुलना : सुबह नींद तो तभी खुलेगी जब बच्चा रात में समय से सो जाएगा। जब आप रात में देर से सोएंगे तो जाहीर सी बात है की बच्चे की नींद सुबह नहीं खुलेगी।

 

 

चिड़चिड़ापन होना : जब बच्चे की नींद ही पूरी नहीं होगी तो उसके स्वाभाव में चिड़चिड़ाहट अपने आप ही आएगी।

 

 

अवसाद : ऐसा होने पर कुछ बच्चे अवसाद का भी शिकार हो जाते है। जिसके बाद उनका बहुत ध्यान रखना पड़ता है।

 

 

मूड में बदलाव : बच्चों में नींद की कमी से उनके मानसिक स्वाभाव में भी काफी बदलाव आने लगता है कुछ बच्चों में समझने की क्षमता कम होने लगती है।

 

 

 

बच्चों में नींद की कमी से बचाव 

 

 

  • बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें, क्योंकि इसकी वजह से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी अच्छा असर पड़ता है।

 

  • उनके काम में उनका हाथ बटाएं ताकि उन्हें किसी भी तरह की समस्या होने पर उनका काम आसान हो जाए।

 

  • माता पिता रात के वक़्त बच्चों के साथ ही सोएं, ताकि उन्हें कोई भी परेशानी हो तो वह अपने माता पिता को बता सकें।

 

  • बच्चों को एक पौष्टिक भोजन खिलाएं इससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों ही बेहतर रहेगा।

 

  • बच्चों के लिए एक टाइम टेबल बनाए जिसमें उनका हर काम करने का समय बना हो।

 

  • गर्मियों के समय सोने से पहले बच्चे को नहलाएं इससे उसकी नींद से जुड़ी समस्या धीरे-धीरे कम हो जाएगी।

 

  • सोने से छह घंटे पहले बच्चों को कैफीन युक्त कोई भी पेय पदार्थ ना दें।

 

  • इस बात का ध्यान रखें की बेडरूम में तापमान आरामदायक हो और बेडरूम में अंधेरा भी हो।

 

  • बेडरूम में इस बात का भी ध्यान रखें की किसी भी तरह का शोर ना हो।

 

  • टीवी और वीडियो गेम को सोने से कम से कम एक घंटे पहले बंद कर देना चाहिए।

 

 


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