किडनी खराब होने पर क्या करे

 

क्या आप जानते है, हमारा शरीर एक अनोखे मशीन की तरह काम करता है, जैसे चाय की छलनी होती है, उसी तरह किडनी (Kidney) भी हमारे शरीर में छलनी का काम करती है। यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थो (Toxic substances) को बाहर निकालने का काम करती है, इसलिए किडनी हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। आजकल किडनी खराब होने की शिकायतें काफी बढ़ रही हैं। बड़ो से लेकर बच्चे तक को किडनी खराब होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) वास्तव में किडनी के फेल होने का मेडिकल नाम है।

 

किडनी फेलियर (Kidney failure) की समस्या आमतौर पर अस्वास्थ्यकर जीवनशैली (Unhealthy lifestyles) की वजह से हो रही है। यह समस्या सिर्फ भारत में ही नहीं, पुरे दुनिया भर में है। लेकिन अब किडनी फेलियर होने पर चिंता करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि नवीनतम दवाओं और इलाज के तरीकों से इन्हें काफी हद तक सुलझाया जा रहा है। यहां तक कि जिन लोगो की किडनी मैच नहीं करती किडनी रोगी से वे भी किडनी ट्रांसप्लांट कर सकते है और साथ ही उम्रदराज लोगों और एचआईवी (HIV) से ग्रस्त लोग में भी प्रत्यारोपण (Implantation) संभव हो चुका है।

 

 

किडनी खराब होने के कारण क्या हैं

 

 

अगर आप डायबिटीज (Diabetes) के पेशेंट है, तो आपको किडनी फेलियर (Kidney failure) की समस्या हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर होना, किडनी की छलनियों में संक्रमण ग्लोमेरुलोनफ्राइटिस (Glomerulonephritis), पथरी का बनना और साथ ही दवाओं का अत्यधिक सेवन भी किडनी फेलियर (Kidney failure) का कारण बन सकता है।

 

 

किडनी के इलाज के दो विकल्प

 

 

जब किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो जाती है, तो इसके इलाज के सिर्फ दो ही विकल्प होते है – ताउम्र (पुरे जीवन) डायलिसिस (Dialysis) पर रहना या किडनी प्रत्यारोपण (kidney transplant) कराना और डायलिसिस की प्रक्रिया काफी खर्चीली होती है।

 

 

किडनी खराब होने से बचने के बेहतर बचाव

 

 

  • गुर्दे की बीमारी से बचें।

 

  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करें (Control blood sugar)।

 

  • अपने ब्लड प्रेशर (blood pressure) को नियंत्रित रखें।

 

  • उन दवाओं के सेवन से बचे जिससे किडनी को नुकसान हो सकता है।

 

 

 

किडनी खराब होने के प्रारंभिक अवस्था के लक्षण

 

 

  • शरीर में सूजन का होना

 

  • पेशाब की मात्रा में कमी होना और साथ ही जलन होना

 

  • बार-बार पेशाब आना और पेशाब में प्रोटीन या खून का आना

 

  • भूख की कमी होना

 

  • जी मिचलाना

 

  • शरीर में रक्त की कमी होना और ब्लड प्रेशर का बढ़ा होना

 

 

किडनी खराब होने पर इन विकल्पों का करें चयन

 

 

हीमोडायलिसिस (Hemodialysis)

मशीन के द्वारा हफ्ते में तीन बार खून साफ किया जाता है।

 

 

पेरीटोनियल डायलिसिस (peritoneal dialysis)

इस डायलिसिस के दौरान पेट में एक कैथेटर (Catheters) लगा दिया जाता है और उसके द्वारा डायलिसिस फ्लूड (Dialysis fluid) को पेट में डाला और निकाला जाता है।

 

 

किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant)

इसमें एक नए किडनी (जो किसी डोनर (Donor) के द्वारा दिया जाता है) को रोगियों के शरीर में प्रत्यारोपित (Implanted) कर दिया जाता है। किडनी प्रत्यारोपित (Kidney implanted) करने के बाद डायलिसिस (Dialysis) की जरूरत नहीं पड़ती। आजकल किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant) के परिणाम काफी अच्छे हो गए हैं।

 

किडनी से संबंधित कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सम्पर्क करे।

 


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