मस्तिष्क रोग के कारण, लक्षण और बचने के उपाय

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यह एक प्रकार का मस्तिष्क रोग है जिसमें उस व्यक्ति का मन या तो बहुत उदास हो जाता है और वह कुछ भी सोचने में असमर्थ होता है। उनके मन में नकारात्मक विचार आते हैं और उनका स्वभाव हमेशा बदलता रहता है। 100 में से लगभग एक व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी समय मानसिक बीमारी का सामना करना पड़ता है। मस्तिष्क रोग के लक्षण 14 साल से 19 साल के बीच शुरू होते हैैं। यह रोग पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है। इसलिए पहले मस्तिष्क रोग के कारण क्या होते हैं यह जानना बहुत जरूरी है।

 

 

 

मस्तिष्क रोग क्या है?

 

मस्तिष्क रोग एक प्रकार का स्वभाव से जुड़ा डिसऑर्डर है। ये दोनों समस्याएं कई दिनों से लेकर महीनों तक हो सकती हैं। ऐसा में उसे हमेशा बेचैनी महसूस होती है और किसी काम में मन नहीं लगता है। इस दौरान, लोग दिन और रात भर बहुत कुछ करते हैं, लेकिन थकते नहीं हैं। मस्तिष्क रोगी की यह प्रतिक्रिया लंबे समय तक बनी रह सकती है। आपके व्यवहार में परिवर्तन भी हाइपोमेनिक हो सकता है, जिसमें व्यक्ति ऊर्जा की कमी और काफी उदास महसूस कर सकता है। नींद न आना और कुछ भी न करना द्विध्रुवी विकार से संबंधित लक्षण हो सकते हैं।

 

 

 

मस्तिष्क रोग के कारण

 

 

  • नींद पूरी ना करने की वजह से भी मानसिक रोग की शुरुआत होती है

 

 

  • ऑफिस के काम का बहुत ज्यादा दबाव लेना

 

 

  • घरेलु झगड़े की वजह से भी परेशान रहना

 

 

  • अन्य तरह की दवाइयों का सेवन करना

 

 

  • ज्यादा समय तक काम करते रहना

 

 

  • समय पर खाना ना खाना

 

 

  • बहुत अधिक नशा करना

 

 

  •  जीवन में कोई दुखद घटना हो जाना।

 

 

मस्तिष्क रोग के लक्षण

 

 

  • अकेले में बड़बड़ाना

 

 

  • बार-बार स्वभाव बदलना

 

 

  • अपने काम में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना

 

 

  • हमेशा जोखिम भरे काम करना

 

 

  • मामूली बातों पर जल्दी गुस्सा करना

 

 

  • नींद ना आना

 

 

 

 

  • हमेशा सिरदर्द की शिकायत होना

 

 

  • बहुत कम या बहुत ज्यादा भूख लगना

 

 

  • मन में नकारात्मक भाव आना

 

 

  • किसी भी तरह के निर्णय लेने में कठिनाई होना

 

 

  • आत्मविश्वास में कमी होना

 

 

  • जिम्मेदारी से कोई काम ना करना चीजें भूलना

 

 

  • मृत्यु और आत्महत्या के विचार मन में आना।

 

 

 

मस्तिष्क रोग से बचने के घरेलु उपचार

 

 

मस्तिष्क रोगी को अपने मूड का ख्याल रखना चाहिए। यदि मन में अधिक उदासी है, तो आपको अपनी दिनचर्या में बदलवा करने की बहुत जरूरत है आपकी बिगड़ी दिनचर्या की वजह से आपका मूड ठीक नहीं रहता है।

 

 

 

मस्तिष्क रोगी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना चाहिए और अपने स्वभाव में बदलाव के लिए उनसे बातें करनी चाहिए, उन्हें अपने रिश्तों का लाभ उठाना चाहिए। इस प्रकार के संबंधों का मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

 

 

ऐसे लोगों से दूर रहें जो आपको नकारात्मक चीजें सोचने के लिए कहें और हमेशा आपसे नकारात्मक बातें करें। ऐसा करने से आप मस्तिष्क रोग से बचे रहेंगे और आपका मूड भी ठीक रहेगा।

 

 

 

रोजाना व्यायाम या योग करें क्योंकि इसकी वजह से आपका पूरा शरीर स्वस्थ रहता है और आपको तनाव नहीं होता है जिससे आपके मस्तिष्क पूरी तरह से स्वस्थ रहता है आप ऊर्जावान महसूस करते हैं।

 

 

 

मस्तिष्क रोगी को पौष्टिक भोजन करना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से ही आप कोई भी काम कर सकते हैं और आपके शरीर में कमजोरी व थकान महसूस नहीं होती है। इसके साथ ही आपको अपने आप को काम में व्यस्त रखना चाहिए। रोगी को वह काम करना चाहिए जिससे उसे खुशी मिले।

 

 

 

यदि आपको किसी बात को लेकर तनाव है तो ये जरूरी नहीं है की आप नशा करें बल्कि आपको शराब और नशा करने से बचना चाहिए।

 

 

 

मस्तिष्क रोग का इलाज

 

 

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी इसका इस्तेमाल ज्यादातर डॉक्टर करते हैं यह एक प्रकार की टॉक थेरेपी होती है। जिसका इस्तेमाल डॉक्टर रोगी से बात करके हल करने की कोशिश करते हैं और उनसे इसके पीछे का कारण पूछते हैं।

 

साइकोएजुकेशन दरअसल इसके द्वारा डॉक्टर उस व्यक्ति और उसके परिवार वालों को ये समझाता है की यह एक डिसऑर्डर है। जो कैसे एक व्यक्ति के स्वभाव पर काबू कर लेता है। इसके आलावा आपको इस तरह की दिक्कत होती है तो आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव करना बहुत जरूरी है वहीं इसके लिए आप हमारे डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं


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