गर्भावस्था के दौरान थायराइड कैसे महिलाओं को प्रभावित करता है और इससे कैसे बचें

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ऐसा बहुत सी महिलाओं के साथ होता है कि उन्हें गर्भावस्थ के दौरान थायराइड जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था के कुछ महीनों के दौरान, थायराइड हार्मोन तेजी से सक्रीय होते हैं। थायराइड हार्मोन मस्तिष्क के सामान्य विकास में एक आवश्यक भूमिका निभाते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के कारण मातृ थायराइड हार्मोन का आपके होने वाले बच्चे पर अपरिवर्तनीय प्रभाव डाल सकता है।

 

शुरुआती अध्ययनों में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान हाइपोथायरायडिज्म से ग्रस्त महिलाओं से जन्म लेने वाले बच्चों में आईक्यू कम होता है और साइकोमोटर (Psychomotor) का विकास करता है। यदि इसे ठीक से नियंत्रित किया जाएं तो आप थायराइड हार्मोन को नियंत्रण में कर सकते हैं।

 

गर्भावस्था के दौरान थायराइड के साथ उन महिलाओं को कई अन्य तरह की समस्या भी होती है। जैसे तनाव, मूड स्विंग, बदन दर्द, सिरदर्द आदि इसके बाद भी अपने साथ-साथ दुसरो का भी ध्यान रखना पड़ता है। वह एक महिला ही है जो अपने स्वास्थ्य के साथ दुसरो के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखती है और उसके साथ अपने चहरे पर मुस्कान भी कायम रखती है।

 

 

 

थायराइड क्या है?

 

 

हमारे गले में एक क्रिस्टल के आकार की ग्रंथि होती है, जिसे थायराइड के नाम से जाना जाता है। यह ग्रंथि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करती है और T3 अर्थात ट्राईआयोडोथायरोनिन (triiodothyronine) और T4 थायरोक्सिनॉर्म (thyroxinorm) का उत्पादन करती है। ये दोनों हार्मोन हमारी सांस, हृदय गति, पाचन तंत्र, शरीर के तापमान, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करती है। जब इस हार्मोनों में किसी तरह का संतुलन बिगड़ता है, तो आपके शरीर का वजन बढ़ने या घटने लगता है। जबकि कुछ महिलाओं के बाल भी झड़ने लगते हैं।

 

 

 

गर्भावस्था के दौरान थाइराइड उन्हें  कैसे प्रभावित करता है?

 

 

अनियंत्रित हाइपरथायरायडिज्म के कई प्रभाव हैं। इससे बच्चे के जन्म से पहले गर्भधारण और जन्म के समय बच्चे का वजन कम हो सकता है। कुछ अध्ययनों से ये भी पता चला है की हाइपरथायरायडिज्म वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की समस्या भी होती है।

 

गर्भावस्था के दौरान थाइराइड वाकई में एक गंभीर समस्या है क्योंकि इसकी वजह से खुद महिला और होने वाले बच्चे की सेहत पर इसका बुरा असार पड़ता है। यह गर्भावस्था को और भी जटिल बना सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड हार्मोन के उच्च स्तर होते हैं जो उच्च बुखार, दस्त और अनियमित हृदय गति, जैसी समस्या होती है।

 

अगर डॉक्टर द्वारा इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो इससे बच्चे का स्वस्थ खराब होने की संभावना ज्यादा होती है और बच्चे को जन्म देने वाली महिला का स्वास्थ्य भी ज्यादातर खराब रहता है।

 

गर्भावस्था के लिए योजना बनाना और अपने थायराइड की स्थिति की जाँच करने के लिए आपको सबसे पहले अपने डॉक्टर से इस मामले में सलाह लेनी चाहिए। आपका गर्भवती होने से प्पेहले पूरी तरह स्वस्थ होना बहुत जरुरी है तभी आप एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

 

हालांकि, अगर ऐसा नहीं होता है और आपको पता चलता है कि आप गर्भवती हैं, तो आपको सबसे पहले डॉक्टर से अपने थायराइड की स्थिति के बारे में पूछना चाहिए। क्योंकि ऐसे समय में आपका लापरवाही करना आपके लिए किसी बड़े जोखिम से कम नहीं होता है।

 

 

 

गर्भावस्थ के दौरान थायराइड के दो प्रकार होते हैं ?

 

 

दरअसल थायराइड के दो प्रकार होते हैं- हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) और हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)।

 

 

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism): इस अवस्था में थायराइड की ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन का उत्पादन करती है।

 

 

हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism): इस थायराइड में ग्रंथि बहुत अधिक मात्रा में हार्मोन का उत्पादन करती है, तभी इसे  हाइपरथायरायडिज्म का नाम दिया गया है।

 

 

 

गर्भावस्थ के दौरान होने वाली समस्या

 

 

  • मूड स्विंग

 

 

  • पेट दर्द

 

 

  • कमर दर्द

 

 

 

 

  • वजन बढ़ना

 

 

  • उच्च रक्तचाप

 

 

  • निम्न रक्तचाप

 

 

  • शरीर टूटना

 

 

  • पैर दर्द शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन

 

 

  • अत्यधिक थकान

 

 

  • कमजोरी महसूस होना

 

 

  • दिल की धड़कन का असामान्य होना

 

 

  • साँस में कमी

 

 

  • भूख ना लगना

 

 

  • सोते समय बेचैनी होना।

 

 

ये सारी समस्याएं एक महिला को तब होती है जब वह एक बच्चे को जन्म देने वाली होती है उसके बावजूद वह कई कामों को करती हैं इतनी सारी परेशानियों के साथ काम करना कोई आसान बात नहीं है। हर दिन एक गर्भवती महिला को कुछ न कुछ परेशानी होती है।

 

 

 

थायराइड के लिए टेस्ट

 

 

थायराइड की जाँच करने के लिए थायराइड फंक्शन टेटस किया जाता है जिसमें  टेस्ट आते हैं :

 

  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)

 

  • हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)

 

  • थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टीएसएच टेस्ट (Thyroid Stimulating Hormone TSH)

 

  • टी3 व टी4

 

 

ये सभी टेस्ट गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर करवाने को कहते हैं लेकिन आप गर्भवती होने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार इस बारे में जरूर पूछें, ये आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा रहेगा।

 

 

 

गर्भावस्थ के दौरान थायराइड से कैसे बचे

 

 

थायराइड की रोकथाम के लिए रखें इन बातों का ध्यान :

 

 

  •  जो महिलाऐं गर्भावस्था के दौरान थायराइड की समस्या सेबचना चाहती हैं, तो ऐसे में उन्हें रोजाना 30 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए और इसके साथ निरंतर डॉक्टर से सलाह लेते रहना चाहिए।

 

 

  • अगर आप नहीं चाहते कि आपके थायराइड का बुरा असर आपके होने वाले बच्चे पर ना पड़े, तो समय पर अपनी सभी दवाएं लें और डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर इसका टेस्ट करवाएं।

 

 

  • गर्भावस्था के दौरान थायराइड के उपचार के लिए दी जाने वाली खुराक को आवश्यकतानुसार कम या बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसका फैसला आपका डॉक्टर आपके स्वास्थ्य को देखते हुए लेता है। थायराइड का उपचार आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान दवा की खुराक से नियंत्रण में किया जाता है, ताकि होने वाले बच्चे पर इसका कोई बुरा असर ना पड़े। लेकिन प्रसव के बाद दवा की खुराक को इसे कम किया जाता है।

 

 

  • गर्भावस्था के दौरान उस महिला को पेट और पाचन को सही रखने की बहुत जरूरत होती है। जिन गर्भवती महिलाओं को थायरॉइड की समस्या होती है, उन्हें अपने आहार में अधिक से अधिक फाइबर लेना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें कब्ज की समस्या नहीं होती है। थायराइड होने से कब्ज की समस्या अधिक होती है।

 

 

  • बच्चे को जन्म के बाद तीसरे से पांचवें दिन के भीतर थायराइड का टेस्ट की सलाह डॉक्टर देते हैं।

 

 

  • थायराइड की समस्या अधिक गंभीर होने पर आयोडीन थेरेपी या सर्जरी को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

इन सभी बातों का ध्यान एक एक महिला को गर्भवती होने से पहले और उस दौरान रखना पड़ता है तभी वह गर्भावस्थ के दौरान थायराइड से बच सकती हैं। यदि आपको इससे जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या है तो आप हमारे डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं


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