एड्स क्यों होता है, जानिए इसके कारण और लक्षण

जब किसी व्यक्ति को एड्स (Aids) होता है तो वही जनता है की अब वो इस दुनिया में ज्यादा दिनों का मेहमान नहीं है। यह बहुत ही खतरनाक बीमारियों में से एक है जिसका इलाज अभी तक संभव नहीं है। दरअसल एचआईवी (HIV) इंसान के इम्यूनोडिफीसिअन्सी वायरस (human Immunodeficiency virus) होता है। यह संक्रमण से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है।

 

यह एक तरीके का गंभीर संक्रमण है जिसका पता टेस्ट के द्वारा ही चलता है। एड्स (Aids) का अर्थ है एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसियेन्सी सिन्ड्रोम (Acquired Immuno Deficiency syndrome)। एचआईवी (HIV) वाले हर व्यक्ति को एड्स नहीं होता है। यह जरुरी नहीं है की एचआईवी वाले हर व्यक्ति को एड्स (Aids) होता हो। इस बीमारी के होने का पता लोगों को काफी बाद में चलता है जिसके बाद उस व्यक्ति का बचना बहुत मुश्किल होता है।

 

 

 

एड्स क्यों होता है ?

 

 

यदि कोई सामान्य व्यक्ति एचआईवी (HIV) प्रभावित होता है तो यह उस व्यक्ति के शरीर में वायरस के द्वारा प्रवेश करता है। लोगों को आमतौर पर यह मानना है की एच.आई.वी. (HIV) पॉजिटिव होने पर उसे एड्स का मरीज माना जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। बल्कि, एचआईवी एक तरीके का वायरस होता है, एचआईवी पॉजिटिव होने के 8-10 साल के भीतर, जब धीरे-धीरे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। तब वह इस घातक बीमारी से घिरा होता है, कुछ लोग एड्स को छुआछूत की बीमारी मानते है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।

 

 

 

Treatment In India

एड्स के कारण

 

 

  • एक इंजेक्शन का इस्तेमाल दोबारा करना,

 

 

  • पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने वाले पुरुष (Gay),

 

 

  • HIV से संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाना,

 

 

  • कई लोगों के साथ यौन संबंध बनाना।

 

 

 

एड्स के लक्षण

 

 

 

 

  • लम्बे समय तक गर्दन और कमर में सूजन,

 

 

  • थकावट,

 

 

  • सोते वक़्त बहुत पसीना आना,

 

 

  • त्वचा पर धब्बे पड़ना,

 

 

  • त्वचा पर घाव, चकत्ते पड़ना,

 

 

  • तेजी से वजन कम होना,

 

 

  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी,

 

 

  • याददाश्त में कमी,

 

 

 

 

 

एड्स के लिए कौन सा टेस्ट किये जाते है

 

 

आपको बता दें की एड्स का पता शरीर में मौजूद एचआई एंटीबॉडी से लगाया जाता है। इसका सबसे आम टेस्ट एलिसा (ELISA Tests for HIV) होता है। एलिसा टेस्ट शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा होता है। कई बार ऐसा होता है की एलिसा (या रैपिड / स्पॉट परीक्षण) टेस्ट  कराने पर भी एचआईवी संक्रमण का पता नहीं चल पता है। उस स्थिति में आपको दोबारा इस टेस्ट को कराने की जरूरत भी पड़ सकती है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी का पता लगाने, यानि डाइग्नोसिस के लिए ईआरएस (ELISA, Rapid or Spot)को दोहराने की जरूरत हमेशा होती है।

 

 

 

एड्स टेस्ट कब कराना चाहिए

 

 

एचआईवी की स्थिति जानने के बाद आपके मन का डर कम होने लगता है। जिसके बाद आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। अगर आपके टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव आया है, तो एचआईवी के इलाज के लिए दवा ली जा सकती है। जिससे आप कई वर्षों तक स्वस्थ रह सकते हैं और अपने साथी में यह रोग संचारित होने की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।

 

 

जिन्हें एड्स होता है उन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। यदि आपने एचआईवी के लिए कभी भी टेस्ट नहीं करवाया है, तो आपको कम से कम एक बार एचआईवी टेस्ट करवा लेना चाहिए। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के सुझाव के अनुसार, अगर आप में एचआईवी के संक्रमण की संभावना है, तो आपको साल में कम से कम एक बार टेस्ट करवा लेना चाहिए। जो लोग रक्तदान करते है या मरने के बाद कोई अंग दान करते है तो उन्हें एक बार ये टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।


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