क्रोनिक किडनी डिजीज के लक्षण, कारण और उपचार

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जब कोई इंसान शराब पीता है तो उसका सीधा असर उसकी किडनी पर ही पड़ता है तो आपको ये जानना बेहद जरुरी है की सीकेडी के लक्षण क्या है ? उसके लिए आप पहले ये जाने की सीकेडी का फूल फॉर्म क्या है। सीकेडी का फूल फॉर्म क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic kidney disease) होता है। किडनी रक्त में मौजूद अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थों (Waste from blood and excess fluid) को छानती हैं और उसे पेशाब के जरिये बाहर निकलती हैं।

 

सीकेडी क्या है ?  (What is CKD)

 

सीकेडी के लक्षण जानने के लिए आपको यह जानना जरुरी है की सीकेडी क्या होता है। दरअसल जब किसी व्यक्ति की किडनी धीरे-धीरे पुरानी होने लगती है तो वह ढंग से काम नहीं करती है। सीकेडी का मतलब होता है जब उस व्यक्ति की किडनी ठीक तरीके से काम नहीं करती है तो उसे सीकेडी यानी क्रोनिक किडनी फेलियर भी कहते है। तब डॉक्टर उस व्यक्ति की किडनी ट्रांसप्लांट करते है या फिर उसे डायलेसिस पर रखते है। सीकेडी में उस व्यक्ति की दोनों किडनी ख़राब हो जाती है।

 

सीकेडी के लक्षण ?

 

  • मांसपेशियों में अचानक ऐंठन : सीकेडी  के सबसे मुख्य लक्षणों में से एक है मांसपेशियों में अचानक ऐठन होना जिसकी वजह से आपको काफी दर्द भी होता है।
  • मतली और उल्टी आना : जिस व्यक्ति की किडनी ख़राब होती है तो उसको अक्सर मतली और उलटी आती है या उलटी जैसा फील होता है।
  • कम भूख लगना : जिन लोगों को सीकेडी होती है उन्हें आम लोगों के मुकाबले बहुत कम भूख लगती है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता।
  • पैरों और टखनों में सूजन (Ankle swelling) : सूजन होना भी सीकेडी के लक्षणों में से एक है। कई बार सूजन होने पर उन लोगों को दर्द भी होता है। जिन लोगों को डायबिटीज होती है उन्हें भी सूजन रहती है।
  • बहुत अधिक पेशाब या पेशाब कम होना : जब किडनी ख़राब होती है तो कुछ लोगों को बहुत ज्यादा तो कुछ को बहुत कम पेशाब आता है।
  • रात में नींद न आना : नींद न आना भी किडनी से जुड़ी समस्या को दर्शाता है, क्योंकि वह अपनी बीमारी को लेकर सोचते रहते है।
  • पेट में दर्द होना : ज्यादातर पेट में दर्द होना भी इसके लक्षण को बताता है और अधिकतर ऐसा तब होता है जब आप कुछ गलत खाते है जो आपकी किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
  • पेशाब में रक्त आना : यदि आपके पेशाब में रक्त आता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरुरत है। क्योंकि इससे आपके शरीर से प्रोटीन की मात्रा अधिक निकलने लगती है।
  • शरीर के वजन में अचानक बदलाव होना : यदि किसी व्यक्ति के वजन में अचानक बदलाव आता है जैसे उस व्यक्ति का वजन बढ़ता है या अचानक कम होता है तो ये सीकेडी के लक्षण होते है।

 

जब किसी व्यक्ति को किडनी से जुड़ी समस्या होती है तो उसे अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। जरा सी बदपरहेजी उनको काफी नुकसान पहुंचा सकती है। तो उसके लिए आइये जानते है उन कारणों के बारे में जिनकी वजह से आपकी किडनी ख़राब होती है। ऐसा नहीं है की आप किसी एक कारण को ही इसके पीछे दोष दें।

 

सीकेडी के कारण ?

 

  • शराब का सेवन : जो लोग शराब का ज्यादा सेवन करते है उन लोगों की किडनी आम लोगों के मुकाबले जल्दी ख़राब होती है।
  • गंदा पानी पीना : अभी भी भारत में ऐसी कई जगह है जहां पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से कई बीमारियां होती है, जिनमें से एक है किडनी की बीमारी।
  • अधिक उम्र होना : हम एक कारण अधिक उम्र को भी मान सकते है। क्योंकि लगातार काम करते-करते किडनी कमजोर हो जाती है और पुरानी भी हो जाती है।
  • शारीरिक श्रम में कमी : जो लोग शारीरिक श्रम करने से बचते है उन्हें भी किडनी से जुड़ी समस्या जल्दी होती है।
  • परिवार में पहले किसी को किडनी की बीमारी होना : यदि किडनी से जुड़ी कोई भी समस्या आपको है तो उसके लिए आपके पूर्वज या परिवार वाले जिम्मेदार हो सकते है।
  • धूम्रपान करना : धूम्रपान किसी भी इंसान के पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है। यह कई रोग होने के खतरे को बढ़ाता है
  • उच्च रक्तचाप : जिन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या रहती है उनकी किडनी पर किसी भी चीज का असर जल्दी पड़ता है।
  • हाई डोज दवाई : बहुत कम ही ऐसा देखा गया है की दवाए किडनी पर असर करती है, जिसकी वजह से ऐसा हो जाता है।
  • ज्यादा देर तक पेशाब रोकना : जो लोग ज्यादा देर तक पेशाब रोकते है, उसकी वजह से भी उनकी किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
  • अनियमित जीवनशैली : आपकी जीवनशैली आपके शरीर के लिए बहुत एहम भूमिका निभाती है इसलिए अपनी दिनचर्या में सुधार रखें।

 

क्रोनिक किडनी डिजीज होने पर उस व्यक्ति को अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है। यदि आपको किडनी से जुडी कोई भी समस्या है तो आप हमारे डॉक्टर से संपर्क कर सकते है। किडनी किसी भी इंसान के शरीर में बहुत एहम भूमिका निभाती है अगर ये ठीक से काम नहीं करती है, तो हमारे शरीर में कई अन्य बीमारी होने का खतरा होता है।


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