जाने प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं, कैसे रखें अपना ख्याल

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किसी भी महिला को जैसे ही अपने प्रेगनेंट होने का एहसास होता है तो ये उसके अभी तक के सबसे सुखद अनुभव में से एक होता है। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। हालांकि, जब एक महिला प्रेगनेंट होती है तो इसके साथ उसके शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव और समस्याएं भी पैदा होती हैं। अगर प्रेग्नेंसी के पहले महीने से ही सभी ज़रूरी तैयारियां शुरू कर दी जाएं, तो गर्भावस्था से जुड़ी तमाम परेशानियों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है

 

 

दरअसल, प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के लिए जानना बहुत जरूरी है। कई बार तो उन्हें अपने प्रेग्नेंट होने तक की सही जानकारी भी नहीं होती है। इसलिए आज हम आपको इससे जुड़ी कुछ बातें बताएंगे।

 

 

 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण

 

 

 

मतली और उल्टी आना

 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण में सबसे पहले उस महिला को बिना कुछ खाएं ही मतली और उल्टी आने लगती है और इसी बीच उसे काफी कमजोरी भी महसूस होती है।

 

 

 

थकावट होना

 

प्रेगनेंसी के पहले महिलाओं के हॉर्मोन में काफी परिवर्तन होते हैं जो कई तरह की परेशानी भरे होते हैं। यही वजह है की उन्हें हर समय थकान महसूस होती है। थकावट और नींद आना प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण हैं, मामूली काम करने के बाद भी आपको थकान महसूस होना बेहद सामान्य बात है। ज्यादा सोने की प्रवृत्ति के लिए प्रोजेस्टेरोन के बढ़ते स्तर को दोषी माना सकते हैं।

 

 

 

ब्रेस्‍ट में बदलाव

 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में कई महिलाओं के ब्रेस्ट के आकार में बदलाव भी आता है और इसकी वजह से उन्हें ब्रेस्ट में काफी दर्द भी होता है ऐसा डॉक्‍टर्स कहते हैं।

 

 

 

खाने का मन नहीं करता

 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में जी मिचलता है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता है, आपको ऐसे में कुछ भी अच्‍छा नहीं लगता और कुछ खाने का मन नहीं करता। यही वजह है की उन्हें कमजोरी भी महसूस होती है.

 

 

 

सूजन होना

 

मासिक धर्म ना होने से पहले, प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है पेट में सूजन या मरोड़ और खिचाव होना, यह प्रोजेस्टेरोन के बढ़ने के कारण होता है। हॉर्मोन का बढ़ता स्तर पाचन में बाधा डालता है और इसी कारण से पेट में गैस भी होने लगती है।

 

 

 

बार–बार पेशाब जाना

 

कुछ महिलाओं को ऐसे में बार–बार पेशाब करने की ज़रूरत महसूस होती है। यह प्रवृत्ति गर्भावस्था के दौरान बढ़ती है जब गर्भाशय, मूत्राशय पर दबाव डालना शुरू करता है, जिसकी वजह से ऐसा होता है। हॉर्मोन में परिवर्तन और रक्त के अतिरिक्त उत्पादन के साथ, बार–बार पेशाब आने की समस्या का सामना करना पड़ता है।

 

 

 

बदन दर्द

 

हॉर्मोनोस में तेजी से बदलाव होने के कारण महिलाओं को पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। ये गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में से एक प्रमुख लक्षण है, लेकिन ये धीरे-धीरे अपने आप ही ठीक हो जाता है।

 

 

 

कब्ज होना

 

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाओं को पाचन क्रिया से जुड़ी परेशानी भी होती है। दरअसल उस समय पाचन क्रिया थोड़ी धीमी हो जाती है, ऐसे में महिला को अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है।

 

 

 

अचानक वजन में बदलाव

 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जिनका वजन शुरुआती समय में ही काफी तेजी से बढ़ता है। जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती है।

 

 

 

साँस फूलना

 

थोड़ा सा काम करने के बाद कई महिलाओं को साँस फूलने जैसी समस्या भी होती है। क्योंकि इंसान के शरीर को दो जीवों के लिए साँस लेने पर अधिक ऑक्सीजन और रक्त की आवश्यकता होती है। बढ़ते बच्चे के साथ अधिक ऑक्सीजन और पोषण की आवश्यकता भी रहती है।

 

 

 

अधिक गर्मी महसूस करना

 

मासिक धर्म के समय तो उन्हें ऐसा होता ही है लेकिन अचानक गर्मी लगना गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों को भी दर्शाता है। यदि आपको महसूस होता है कि गर्मी की लहर आपके शारीरिक अंगों को जकड़ रही है, तो यह आपके गर्भवती होने का संकेत हो सकता है।

 

 

 

मूड स्विंग होना

 

आपको बता दें की प्रेगनेंसी के पहले महीने में गर्भवती महिला के व्यवहार और स्वभाव में भी काफ़ी बदलाव आता है। यह उतार-चढ़ाव गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले हार्मोन्स में बदलाव की वजह से होता है। इस दौरान गर्भवती महिला का मूड लगातार बदलता रहता है, जैसे कि वह किसी भी बात पर चिढ़ जाती है या उसे बे वजह झुंझलाहट आती है।

 

ये सभी लक्षण एक महिला के प्रेगनेंट होने के शुरुआती संकेत होते हैं। लेकिन बहुत सी महिलाएं संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं, उन्हें काफी बाद में इस चीज का एहसास होता है। जिसके बाद उन्हें अपनी सेहत का बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि उनकी सेहत के साथ अब एक और ज़िंदगी जुड़ जाती है। सबसे ज्यादा उन्हें अपने खान-पान का ध्यान रखना होता है और ज्यादा शारीरिक श्रम से भी बचना होता है, वरना उन्हें बहुत अधिक थकान महसूस होती है और यह थकान उनके पूरे शरीर में दर्द का कारण बनती है।


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