मधुमेह के उपचार के लिए कितने प्रकार के इंसुलिन लिए जाते हैं?

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भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और ऐसा होने की वजह से कई बीमारियां भी होने की संभावना ज्यादा होती है। अगर हम मधुमेह की बात करें तो भारत में इसके मरीजों की संख्या में आए दिन वृद्धि हो रही है, जो हमारे लिए एक चिंता का विषय है। एक मधुमेह के मरीज को अपने शुगर को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन की जरुरत की होती है। लेकिन उससे पहले आपको यह समझना होगा की मधुमेह के उपचार के लिए इंसुलिन के प्रकार कितने होते हैं। क्योंकि हर व्यक्ति में मधुमेह के लक्षण अलग होते हैं।

 

दरअसल डॉक्टर मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के हिसाब से ही उसे इंसुलिन देते हैं। इंसुलिन छह प्रकार के होते हैं, इसलिए हर व्यक्ति की जरुरत के हिसाब से उसे इंसुलिन दिया जाता है। हर व्यक्ति में इंसुलिन अलग प्रकार से काम करता है। इसे वसा (Fat) ऊतक (Tissue) में इंजेक्ट किया जाता है, जो इसे रक्तप्रवाह में अवशोषित करने में मदद करता है। कुछ इंसुलिन दवाएं दूसरों की तुलना में तेजी से काम करती हैं, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता है। कुछ इंसुलिन लंबे समय तक काम करती हैं, लेकिन दूसरों की तुलना में धीरे-धीरे काम करती है।

 

 

 

इंसुलिन की विशेषताएँ

 

 

तीन प्रकार हैं जो इंसुलिन को परिभाषित करते हैं।

 

ऑनसेट (Onset) : इंसुलिन को रक्त शर्करा कम करने में कितना समय लगता है।

पीक टाइम (Peak time) : इंजेक्शन के बाद का समय जब इंसुलिन रक्त शर्करा को कम करने में सबसे प्रभावी होता है।

ड्यूरेशन (Duration) : कब तक इंसुलिन रक्त शर्करा को कम करता रहता है।

 

 

मधुमेह के प्रकार

 

 

टाइप 1 डायबिटीज : यदि आपको टाइप 1 डायबिटीज है, तो आपका अग्न्याशय बिल्कुल भी इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है। इसका मतलब यह है कि टाइप 1 मधुमेह वाले किसी व्यक्ति को अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन का उपयोग करना चाहिए।

 

 

टाइप 2 डायबिटीज : टाइप 2 डायबिटीज के साथ, आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना सकता है या अब प्रभावी रूप से इंसुलिन का उपयोग नहीं कर सकता है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध के रूप में जाना जाता है। शुरुआत में, आप मौखिक दवाओं के साथ टाइप 2 मधुमेह का प्रबंधन करने में सक्षम हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ आपको मौखिक दवाओं के साथ या इसके बजाय इंसुलिन का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है।

 

 

गर्भकालीन मधुमेह : गर्भकालीन मधुमेह एक प्रकार का मधुमेह है जो केवल गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है। गर्भकालीन मधुमेह से पीड़ित कई महिलाएं आहार और व्यायाम या मौखिक मधुमेह दवाओं के माध्यम से अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित रख सकती हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए इंसुलिन की जरुरत पड़ सकती है।

 

 

 

इंसुलिन के प्रकार

 

 

  • रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन

 

 

  • रेग्युलर इंसुलिन या शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन

 

 

  • इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन

 

 

  • लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन

 

 

  • अल्ट्रा-लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन

 

 

  • इंहेल्ड इंसुलिन।

 

 

जो मधुमेह के मरीज होते हैं उन्हें केवल 1 प्रकार के इंसुलिन की जरुरत नहीं होती है, जबकि सभी को उनके रक्त शर्करा के अनुसार इंसुलिन दी जाती है और इस बात का निर्णय आपका डॉक्टर लेता है कि आपके शरीर के हिसाब से कौन-सी इंसुलिन लेना आपके लिए बेहतर रहेगा।

 

 

 

 मधुमेह के उपचार में इन्सुलिन कैसे काम करता है ?

 

आपको बता दें की जब मधुमेह के मरीज की शुगर दवाओं से भी कंट्रोल नहीं हो पाती है तब उसका डॉक्टर उसे इंसुलिन लेने की सलाह देता है। आपको ये तो मालूम ही होगा की मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा को सामान्य करने के लिए इंसुलिन दिया जाता है। यह माना जाता है कि मधुमेह रोगियों को हमेशा इंसुलिन की आवश्यकता होती है, लेकिन उनका ऐसा मानना गलत है। टाइप 2 डायबिटीज वाला मरीज भी इंसुलिन के बिना इसका इलाज कर सकते हैं। टाइप 2 मधुमेह को दवाओं के साथ-साथ उचित आहार और नियमित दिनचर्या से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

 

जब कोई व्यक्ति मधुमेह का शिकार होता है तो इसके पीछे उसकी खराब जीवनशैली जिम्मेदार होती है। लेकिन बहुत से लोग ऐसे है जो इस बीमारी के होने पर काफी घबरा जाते हैं। आपको मधुमेह से घबराने की जरुरत नहीं है। बस आप अपनी जीवनशैली में बदलाव करके इस बीमारी को खुद से दूर रख सकते है और जिन्हे यह बीमारी है वह ऐसा करके इसे नियंत्रण में भी रख सकते हैं। अब मधुमेह के उपचार के लिए कितने प्रकार के इंसुलिन लिए जाते हैं और कैसे लिए जाते हैं इसकी सलाह आप हमारे डॉक्टर से भी ले सकते हैं


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