मधुमेह में इंसुलिन की भूमिका क्या होती है ?

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जब किसी व्यक्ति को मधुमेह होता है, तो उसके शरीर में इंसुलिन की क्या भूमिका होती है ? इसी के बारे में जानेंगे। आपको बता दें की इंसुलिन इंसान के शरीर के लिए बहुत उपयोगी तत्व में से एक है। क्योंकि इंसुलिन के जरिए ही रक्त में, कोशिकाओं को शुगर मिलता है, मतलब इंसुलिन आपके शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है आप इसे ट्रांसपोर्टर भी कह सकते है। इंसान के शरीर में इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं (Cells) को ऊर्जा मिलती है। इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इंसुलिन की अतिरिक्‍त खुराक दी जाती है।

 

इंसुलिन क्या है ?

 

इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन होता है। जिसका निर्माण अग्नाशय (Pancreatic) में होता है। इंसान के शरीर में आमाशय कार्बोहाइड्रेट्स को रक्त शर्करा में परिवर्तित करता है। इंसुलिन के जरिये ही शरीर में मौजूद रक्त शर्करा को ऊर्जा मिलती है। यदि इंसान के शरीर में मौजूद पैनक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर दे, तो ब्‍लड ग्‍लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होगा। आपके शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण उस व्यक्ति को जल्दी थकान होने लगेगी, इसलिए इंसुलिन से आपके शरीर में ऊर्जा रहती है और यही वजह है की इंसान के शरीर में इंसुलिन का निर्माण होना बहुत जरूरी है।

 

मधुमेह क्या है ?

 

आपको बता दें की मधुमेह किसी व्यक्ति को तब होता है जब वह आनुवांशिक होकर अनियमित जीवनशैली जीने लगता है। भारत में प्रतिवर्ष मधुमेह के रोगियों की संख्या में वृद्धि होती ही जा रही है। दरअसल मधुमेह (Diabetes) को आज से 50 वर्ष पहले ‘राजरोग’ कहा जाता था। क्योंकि पुराने जमाने में यह रोग राजा-महाराजाओं को ही होता था। मधुमेह होने पर उस व्यक्ति के शरीर में शर्करा (शकर) रक्तप्रवाह में बढ़ जाती है। इसका कारण शकर या मिठाई खाने से नहीं, बल्कि अग्नाशय (पेनक्रियाज) का कार्य अनियंत्रित होने लगता है। यही वजह है की उस व्यक्ति को मधुमेह हो जाता है।

 

मधुमेह के प्रकार

 

दरअसल मधुमेह तीन तरीके का होते है टाइप 1, टाइप 2, टाइप 3 मधुमेह। अगर हम टाइप 1 मधुमेह की बात करें तो इसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। जबकि टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर या तो सही मात्रा में इंसुलिन बनाना बंद कर देता है या फिर सही ढंग से काम  करना कम कर देता है। टाइप 3 मधुमेह तब होता है जब आपने किसी कारण अपने पैन्क्रियाज की सर्जरी कराई हो, तो आपको टाइप 3-सी होने की ज्यादा संभावना होती है। इसमें सिर्फ इंसुलिन की मात्रा ही कम नहीं होती, बल्कि होर्मोंस के साथ खाने को डाइजेस्ट करने वाला प्रोटीन भी कम मात्रा में बनता हैं।

 

क्या है मधुमेह के लक्षण ?

 

  • ज्यादा प्यास लगना

 

  • बार-बार पेशाब का आना

 

 

  • कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना

 

  • हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म

 

  • चक्कर आना

 

  • चिड़चिड़ापन

 

  • कमजोरी महसूस होना

 

  • बहुत जल्दी थकान होना

 

इंसुलिन की भूमिका क्या होती है ?

 

इंसुलिन इंसान के शरीर के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को नियंत्रित करता हैं। ये आपके शरीर में भोजन करने के 10-मिनट के भीतर अपने चरम स्तर तक बढ़ जाता हैं। दरअसल इंसुलिन का काम होता है ग्लूकोज और अमीनो एसिड को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश दिलाना। यहां इंसुलिन और अन्य हार्मोन यह निश्चित करते हैं कि इन पोषक तत्वों को ऊर्जा बनाने के लिए या भविष्य के उपयोग के लिए संग्रहीत किया जाए या नहीं।

इंसुलिन कैसे लिया जाता है ?

 

इसकी सलाह मधुमेह के मरीज को डॉक्टर तब देते है, जब किसी व्यक्ति के शरीर में इसकी बहुत ज्यादा कमी हो जाती है। वैसे ज्यादातर डॉक्टर इंसुलिन देने के लिए सिरिंज का इस्तेमाल करते है। आप अपनी त्वचा की फ़ैट लेयर पर इंसुलिन का इंजेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ परिस्थिति में डॉक्टर इंसुलिन पेन और पंप भी इस्तेमाल करते हैं। कार्ट्रिज और सुई के ज़रिए इंसुलिन पेन्स हॉर्मोन भेजते हैं। डॉक्टर उस मरीज की ज़रूरतों के मुताबिक़ उसकी खुराक की फ्रिक्वेंसी को तय करते हैं।

इंसुलिन के प्रकार

 

इंसुलिन चार प्रकार का होता है। पहला होता है शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन- इसका असर इंसान के शरीर में बहुत तेजी से (30-36 मिनट में) होता है  और इसका प्रभाव 6-8 घंटे तक के लिए रहता है। इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन- इसका असर बहुत धीरे-धीरे (1-2 घंटे में) होता है, लेकिन इसका असर 10-14 घंटे तक रहता है। लॉग एक्टिंग इंसुलिन 24 घंटे तक प्रभावी रहता है और इंसुलिन का मिश्रण जो सबको मिलाकर प्रयोग किया जाता है।

यदि आपको मधुमेह है तो आप हमारे डॉक्टर से परामर्श ले सकते है क्योंकि आज के समय में अनियमित जीवनशैली जीने वाले लोगों को मधुमेह होता है। इसके लक्षण दिखने पर आपको लापरवाही नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।


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