अंडाशय कैंसर के कारण और जानिए इसका इलाज कैसे होता है?

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अंडाशय कैंसर केवल महिलाओं को प्रभावित करता है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में लाखों महिलाओं की मौत भी हो जाती है। कैंसर होने पर कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित होती हैं और बढ़ती जाती हैं। ऐसे में शरीर के कई हिस्सों में कैंसर हो सकता है। अंडाशय कैंसर महिलाओं में होने वाला कैंसर है। इसकी शुरुआत अंडाशय से होती है। महिलाओं में पाई जाने वाली प्रजनन ग्रंथियों को अंडाशय कहा जाता है। यह प्रजनन के लिए अंडे का उत्पादन करता है। ये अंडे फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से गर्भाशय तक जाते हैं। ये निषेचित अंडे गर्भाशय में प्रवेश करते हैं और एक भ्रूण में विकसित होते हैं।

 

 

अंडाशय कैंसर क्या है? (What is ovarian cancer in Hindi)

 

 

अंडाशय के कैंसर में, अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बनते हैं। गर्भाशय के कैंसर से महिला को गर्मभवति होने में समस्या हो सकती है। दूसरी ओर, अंडाशय के कैंसर गर्भाशय और ट्यूबों को नुकसान पहुंचाते हैं। अंडाशय के कैंसर अंडाशय में किसी भी प्रकार के कैंसर के विकास को संदर्भित करता है। यह ज्यादातर अंडाशय की बाहरी परत से उत्पन्न होता है। अंडाशय के कैंसर का सबसे आम प्रकार उपकला अंडाशय के कैंसर (epithelial ovarian cancer) कहा जाता है। अन्य प्रकार अंडाशय कम घातक संभावित ट्यूमर (ovarian low malignant potential tumor), जर्म सेल ट्यूमर और सेक्स कॉर्ड-स्ट्रोमल ट्यूमर हैं।

 

 

अंडाशय कैंसर के कितने प्रकार होते हैं? (How many types of ovarian cancer are there in Hindi)

 

  • अंडाशयी टेराटोमा (Ovarian Teratoma)

 

  • एपिथेलियल अंडाशय कैंसर (Epithelial Ovarian Cancer)

 

 

  • अंडाशयट्यूमर (Borderline Ovarian Tumour)

 

  • प्राइमरी पेरिटोनियल कैंसर (Primary Peritoneal Cancer)

 

  • अंडाशयी ग्रैनुलोसा ट्यूमर (Granulosa Tumour Of The Ovary)

 

 

अंडाशय कैंसर के कारण क्या है? (What causes ovarian cancer in Hindi)

 

  • जेनेटिक: अगर परिवार में किसी को अंडाशयकैंसर है, तो आपको भी हो सकता है। इसलिए नियमित जांच कराएं।

 

  • अधिक उम्र होना : डॉक्टर के मुताबिक अंडाशय कैंसर के ज्यादातर मामले 65 साल बाद देखने को मिले हैं।

 

  • ओव्यूलेशन की संख्या कम या ज्यादा होना: डॉक्टर के अनुसार, ओव्यूलेशन की संख्या भी अंडाशय के कैंसर के खतरे को निर्धारित करती है। उनके अनुसार, जिन महिलाओं ने कभी गर्भधारण नहीं किया है, उनमें अंडाशय के कैंसर का खतरा अधिक होता है। साथ ही, जिन महिलाओं ने अपने जीवनकाल में कभी गर्भनिरोधक नहीं लिया है, उनमें भी अंडाशय के कैंसर का खतरा अधिक होता है। पीरियड्स की जल्दी शुरुआत और देर से मेनोपॉज भी अंडाशय कैंसर का कारण हो सकता है। अधिक मोटापा, कम प्रजनन क्षमता, और स्तन कैंसर वाले मरीजों को भी अंडाशय के कैंसर का खतरा होता है।

 

 

अंडाशय कैंसर के इलाज के क्या विकल्प हैं? (What are the treatment options for ovarian cancer in Hindi)

 

 

दवाएं: डॉक्टर का कहना हैं आज के समय में कई दवाएं उपलब्ध हैं। जो सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है। इन दवाओं के जरिए कैंसर को ठीक करने का प्रयास किया जाता है।

 

हार्मोन थेरेपी: अंडाशय कैंसर का इलाज हार्मोन थेरेपी के जरिए भी किया जाता है। हार्मोन एस्ट्रोजन को कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचने से रोकने का काम करता है। एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोका जा सकता है।

 

कीमोथैरेपी: कीमोथैरेपी का प्रयोग कैंसर कोशिकाओं को दवाएं देकर उन्हें रोकने के लिए किया जाता है। इसमें लगभग 3 से 6 सत्र होते हैं, जो लगभग 3 से सप्ताह तक चल सकती है।

 

सर्जरी: ज्यादातर मामलों में अंडाशय कैंसर का इलाज सर्जरी से किया जाता है।

 

अंडाशय कैंसर के इलाज के लिए भारत के बेस्ट हॉस्पिटल

 

 

यदि आप अंडाशय कैंसर का सही इलाज करवाना चाहते हैं तो  हमारे माध्यम से इनमें से किसी भी हॉस्पिटल में अपना इलाज सकते हैं, इसमें शामिल हैं:

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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क्या है अंडाशय कैंसर के लक्षण? (What are the symptoms of ovarian cancer in Hindi)

 

 

ब्लोटिंग होना

पेट फूलना तो आजकल आम हो गया है, बदलते खान-पानी की वजह से भी लोगों में ये समस्या देखने को मिलती है। लेकिन आपका पेट हमेशा फूला रहता है  तो आपके तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसे नजरअंदाज ना करें क्योंकि ये अंडाशय कैंसर हो सकता है।

 

कम खाने पर भी पेट जल्दी भरना

कई बार लोग थोड़ा सा खाना खाकर कहते हैं कि उनका पेट भर गया है, हालांकि ऐसा बदलते मौसम की वजह से हो सकता है। लेकिन यह अंडाशय कैंसर को दावत देने वाला लक्षण भी हो सकता है। इसलिए अगर थोड़ा-बहुत खाने पर ही आपको ऐसा लगे कि अब और नहीं खा सकते और पेट भर गया है तो पको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 

टॉइलटा करते वक्त जलन होना

टॉइलट जाते वक्त जलन होने के लक्षण को यूटीआई से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर टॉइलट जाते वक्त ब्लैडर में दर्द महसूस हो या प्रेशर का अहसास हो, बार-बार टॉइलट जाना पड़ रहा हो तो यह अंडाशय कैंसर का संकेत हो सकता है।

 

गर्भनिरोधक गोलियां का सेवन करना

गर्भनिरोधक गोलियों हार्मोन को नियंत्रित करने से लेकर अनचाहे गर्भधारण को रोकने का काम करती है। लेकिन इनके अलावा, गर्भनिरोधक गोलियां कैंसर की शुरुआत को रोकने में प्रभावी पाई गई हैं।

 

अन्य लक्षणों में शामिल है :

 

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द

 

  • असामान्य योनि स्राव

 

  • अपच की शिकायत

 

 

  • जल्दी पेशाब आना

 

  • पेट दर्द

 

  • सेक्स के दौरान दर्द

 

 

ओवेरियन कैंसर के लिए टेस्ट (test for ovarian cancer in Hindi)

 

 

  • सीबीसी (Complete Blood Count)

 

  • कैंसर एंटीजन 125 लेवल का टेस्ट

 

  • HCG लेवल का टेस्ट

 

  • अल्फा-फेटोप्रोटीएन का टेस्ट

 

  • किडनी की जांच

 

  • बायोस्कोपी

 

  • इमेंजिंग्स टेस्ट

 

  • मेटास्टाटिस टेस्ट

 

  • इत्यादि तरीकों से ओवेरियन कैंसर की जांच की जाती है।

 

यदि आप अंडाशय कैंसर का इलाज कराना चाहते हैं या इससे सम्बंधित किसी भी तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें या आप हमसे व्हाट्सएप (+91 9654030724) पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आप हमारी सेवाओं के संबंध में हमें Connect@gomedii.com पर ईमेल भी कर सकते हैं। हमारी टीम जल्द से जल्द आपसे संपर्क करेगी। हम आपका सबसे अच्छे हॉस्पिटल में इलाज कराएंगे।

 
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