शिंगल्स बीमारी के घरेलू इलाज (Home Remedies) क्या है ?

शिंगल्स एक दर्दनाक त्वचा रोग है जो वेरिसेला जोस्टर वायरस (Varicella Zoster Virus) के कारण होता है। यह वही वायरस है जो चिकनपॉक्स (चिकन पॉक्स) का कारण बनता है। चिकनपॉक्स ठीक हो जाने के बाद, यह वायरस आपके शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहता है और बाद में शिंगल्स के रूप में सक्रिय हो सकता है।

 

शिंगल्स एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। जल्दी निदान और उपचार से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है। एंटीवायरल दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, और घरेलू नुस्खे इस बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वस्थ जीवनशैली, उचित आहार, और तनाव प्रबंधन से शिंगल्स के जोखिम को कम किया जा सकता है। यदि आपको शिंगल्स के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित उपचार लें।

 

 

शिंगल्स क्या बीमारी है? (shingles Kya Hota Hain in Hindi)

 

शिंगल्स, जिसे हरपीज जोस्टर भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो वेरिसेला जोस्टर वायरस (Varicella Zoster Virus) के कारण होता है। यह वही वायरस है जो चिकनपॉक्स (चिकन पॉक्स) का कारण बनता है। चिकनपॉक्स से ठीक हो जाने के बाद, यह वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहता है और बाद में सक्रिय हो सकता है, जिससे शिंगल्स होता है। शिंगल्स मुख्यतः तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) और त्वचा को प्रभावित करता है और बेहद दर्दनाक हो सकता है।

 

 

शिंगल्स के लक्षण क्या होते हैं ? (Shingles Ke symptoms Kya Hote Hain in Hindi)

 

शिंगल्स के निम्नलिखित लक्षण होते हैं जैसे की-

 

  • दर्द और जलन: शिंगल्स से प्रभावित त्वचा में दर्द और जलन होती है।
  • खुजली और चकत्ते: त्वचा पर लाल चकत्ते और फफोले (ब्लिस्टर) होते हैं।
  • त्वचा संवेदनशीलता: त्वचा संवेदनशील हो जाती है और छूने पर दर्द महसूस होता है।
  • बुखार और सिरदर्द: शिंगल्स के साथ बुखार और सिरदर्द हो सकता है।

 

 

शिंगल्स बीमारी का घरेलू इलाज क्या है ? (Shingles bimari ke home remedies kya hain in hindi)

 

शिंगल्स बीमारी के घरेलु इलाज मुख्यतः इसके लक्षणों को कम करने और संक्रमण को जल्दी ठीक करने के लिए किया जाता है। यहाँ शिंगल्स के घरेलु इलाज के कुछ महत्वपूर्ण तरीके दिए गए हैं:

 

  • एलोवेरा: एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। ताजे एलोवेरा जेल को सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से राहत मिल सकती है।

 

  • शहद: शहद में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं। इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से फफोलों का संक्रमण कम हो सकता है और जल्दी ठीक हो सकता है।

 

  • नारियल तेल: यह त्वचा को मॉइस्चराइज करता है और संक्रमण से बचाता है।

 

  • ठंडी पानी की पट्टी: एक साफ कपड़ा ठंडे पानी में भिगोकर प्रभावित क्षेत्र पर रखें। यह जलन और खुजली को कम करने में मदद करता है।

 

  • ओटमील बाथ: ओटमील बाथ से त्वचा की जलन और खुजली कम हो सकती है। एक बाथटब में गुनगुना पानी भरें और उसमें ओटमील डालकर 15-20 मिनट तक बैठें।

 

  • बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बनाकर इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से खुजली और जलन कम हो सकती है। इसे 10-15 मिनट तक रखें और फिर गुनगुने पानी से धो लें।

 

 

शिंगल्स बीमारी क्यों होती हैं ? (Shingles Bimari kyu Hoti Hain in Hindi)

 

शिंगल्स, जिसे हरपीज जोस्टर भी कहा जाता है, वेरिसेला जोस्टर वायरस (Varicella Zoster Virus) के पुनः सक्रिय होने के कारण होती है। यह वही वायरस है जो चिकनपॉक्स (चिकन पॉक्स) का कारण बनता है। जब किसी को चिकनपॉक्स होता है, तो वायरस शरीर में तंत्रिका कोशिकाओं में निष्क्रिय (डॉर्मेंट) अवस्था में रह जाता है। वर्षों या दशकों बाद, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, तो यह वायरस फिर से सक्रिय हो सकता है और शिंगल्स का कारण बन सकता है।

 

उम्र: उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे शिंगल्स का जोखिम बढ़ जाता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में शिंगल्स का खतरा अधिक होता है।

 

प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी: अगर किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो शिंगल्स होने का खतरा अधिक होता है। यह कमजोरी विभिन्न कारणों से हो सकती है, जैसे:

 

  • एचआईवी/एड्स
  • कैंसर
  • अंग प्रत्यारोपण के बाद इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं का उपयोग
  • लंबी अवधि तक स्टेरॉयड का उपयोग

 

तनाव और मानसिक दबाव: अत्यधिक मानसिक या शारीरिक तनाव प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है, जिससे शिंगल्स का जोखिम बढ़ जाता है।

 

चिकनपॉक्स का इतिहास: जिन लोगों को पहले चिकनपॉक्स हुआ है, उन्हें शिंगल्स होने का जोखिम होता है क्योंकि वेरिसेला जोस्टर वायरस उनके शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहता है।

 

शिंगल्स का तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव: वेरिसेला जोस्टर वायरस तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। जब वायरस पुनः सक्रिय होता है, तो यह तंत्रिकाओं के माध्यम से यात्रा करता है और त्वचा पर चकत्ते और फफोले उत्पन्न करता है। यह प्रक्रिया अत्यधिक दर्दनाक होती है क्योंकि तंत्रिकाएँ उत्तेजित होती हैं और सूजन हो जाती है।

 

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