क्रोनिक फैटिग सिंड्रोम (fatigue syndrome) क्या है इसे नजरअंदाज न करें

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हर कोई कई बार खुद को थका हुआ महसूस करता है लेकिन ऐसा कुछ लोगों के साथ हमेशा होता है। कहीं ये क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का लक्षण तो नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (Chronic fatigue syndrome) क्या है ? दरअसल जब किसी व्यक्ति को लगातार थकान रहती है तो इस स्थिति को क्रोनिक फटीग सिंड्रोम कहा जाता है और यह कभी-कभी ऐसा गंभीर रूप ले लेता है कि सामान्य कामकाज में समस्या होती है। ऐसा होने पर भरपूर आराम और नींद भी आपको राहत महसूस नहीं होने देती।

हालाँकि यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं को इससे अधिक समस्याएं होती हैं। एक अनुमान के अनुसार, भारत में लगभग एक तिहाई महिलाएं लगातार थकान की शिकायत करती हैं। इनमें से आधी महिलाओं को छह महीने से अधिक समय से यह समस्या है।

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Chronic fatigue syndrome)

 

  • ध्यान केंद्रित करने में समस्या

 

 

  • लगातार सिरदर्द होना

 

 

  • याददाश्त कमजोर होना

 

 

  • अनिद्रा

 

 

  • जी मिचलाना

 

तो ये हैं क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण लगातार बने हुए हैं तो आपको इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। आपको तुरंत इसे नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।

 

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण (Causes of Chronic fatigue syndrome)

 

डॉक्टरों द्वारा काफी खोजबीन के बाद भी इस बीमारी का अभी तक कुछ सही कारण का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, बीमारी के कुछ संभावित कारणों के बारे में जानकारी प्राप्त की गई है। जो इस प्रकार हैं :

 

  • ज्यादा समय तक तनाव और चिंता

 

  • हॉर्मोन्स का असंतुलन

 

  • विषाणुजनित संक्रमण

 

  • हाई ब्लड प्रेशर

 

  • कुपोषण का शिकार होना

 

 

  • कमज़ोर इम्यून सिस्टम

 

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम क उपचार (Treatment of Chronic fatigue syndrome)

 

जीवनशैली में बदलाव लाएं

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के निश्चित उपचार की कमी के कारण आपको इससे बचने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगी तभी आप इसे नियंत्रित कर सकते है। क्रोनिक फटीग सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को बहुत कम मात्रा में कैफीन का सेवन करना चाहिए। शराब और निकोटीन से दूरी भी बनाए रखी जानी चाहिए। थकावट और सुस्ती महसूस होने पर भी दिन में नहीं सोना चाहिए क्योंकि यह आपकी रात की नींद को प्रभावित करता है।

 

 

अपने खान-पान पर ध्यान दें

 

हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का मूल स्रोत सिर्फ भोजन है। यदि आप क्रोनिक फटीग सिंड्रोम से जूझ रहे हैं, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप अपना आहार पौष्टिक रखें। आपको वसायुक्त, तला हुआ और प्रसंस्कृत भोजन से बचना चाहिए। इसके अलावा चीनी के उपयोग को कम करने की कोशिश करें।

 

 

विटामिन डी मिलेगा

 

विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों की कमी ज्यादातर लोगों में आम है और शरीर के कई कार्यों को करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विटामिन डी आपकी ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के उपचार में एक बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए अपने आहार में अधिक विटामिन डी शामिल करें और सिंड्रोम को नियंत्रित करने के लिए धूप लें।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का अभी तक कोई इलाज नहीं है। हालांकि शोधकर्ता इस पर शोध कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लक्षणों को पहचानने के बाद एक-एक करके क्रॉनिक फेटनिंग सिंड्रोम का इलाज संभव है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान या सिरदर्द रहता है, तो चिकित्सक रोगी के शरीर में क्या कमी है, इसकी पहचान करके उपचार शुरू करता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस बीमारी के लक्षण लगातार 6 महीने तक महसूस किए जाएं तो यह गंभीर बीमारी में बदल सकता है। इसलिए, अपने नजदीकी डॉक्टर से समय पर सलाह लेनी चाहिए।

 

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम को ठीक होने में कितना समय लगेगा?

 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के ठीक होने का अनुमान लगना थोड़ा कठिन है और यह हर व्यक्ति  करता है। क्योंकि सीएफ़एस की समान तीव्रता से ग्रस्त रोगियों में भी अत्यंत भिन्नताएँ होती हैं। अन्य रोगों की तरह इसमें भी आशावादी होना और सकारात्मक रहने से लाभ होता है।


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