स्वास्थ्य खराब होने पर किडनी कैसे प्रभावित होती है

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जब किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होता है तो उसे अनेक तरह कि स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। जिसमें उनकी किडनी के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसा होने पर वह सीकेडी का कारण बन सकती हैं। यह आपके स्वास्थ्य को और खराब कर सकती है। यदि वे इतनी खराब है कि वे काम करना बंद कर देती है, तो इसे किडनी फैलियर कहते हैं, या अंत-चरण वृक्क रोग (end-stage renal disease ESRD) कहा जाता है। इसके उपचार में आमतौर पर या तो डायलिसिस होता है या बहुत ज्यादा खराब स्थिति में किडनी का ट्रांसप्लांट किया जाता है।

 

 

 

आपका स्वास्थ्य कब खराब होता है

 

 

  • गलत खान पान

 

 

  • शराब का अधिक सेवन

 

 

  • धूम्रपान करना

 

 

  • पानी कम पीना

 

 

  • शारीरिक श्रम में कमी

 

 

  • बहुत अधिक श्रम करना

 

 

  • फास्ट फूड का अधिक सेवन

 

 

  • व्यायाम या योग ना करना

 

 

  • समय पर भोजन ना करना

 

 

 

 

  • पेशाब रोकना

 

 

  • पेशाब करने में दिक्कत होना

 

 

आपके स्वास्थ्य के खराब होने के पीछे आपकी कुछ बुरी आदतें ही जिम्मेदार होती हैं। सबसे पहले आपको पाचन से जुड़ी समस्या होती है या तो कब्ज होता है या दस्त लगते हैं। जिसके बाद आप बीमार होने लगते है। आपको सर्दी जुकाम होता है या अन्य संक्रमण होने का खतरा होता है और आप लगातार बीमार रहने लगते हैं।

 

 

 

किडनी खराब होने के लक्षण

 

 

  • पेशाब करने में दर्द होना

 

 

  • बहुत अधिक पेशाब आना

 

 

  • पेशाब पर नियंत्रण ना होना

 

 

  • पेशाब जाने पर पेशाब ना होना

 

 

  • मांसपशियों में खिंचाव

 

 

  • मतली और उल्टी आना

 

 

 

 

स्वास्थ्य खराब होने पर किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है अब आपको ये समझ आ ही गया होगा। दरअसल ऐसी स्थिति में किडनी बहुत धीरे-धीरे काम करती है और कुछ महीनों बाद काम करना बंद कर देती है। दरअसल किडनी के खराब होने का पता कई लोगों को काफी बाद में चलता है।

 

ऐसा होने के बाद डॉक्टर के पास दो ही विकल्प होते हैं उसके बाद डॉक्टर उस व्यक्ति के स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए ही किसी निर्णय पर पहुँचता है। हालांकि, सीकेडी के 5 चरण हैं। अंतिम चरण में, पीड़ित व्यक्ति की किडनी सामान्य व्यक्ति की तुलना में 15% तक कम काम करती है, जिसे ESRF (End Stage Renal Failure) हो सकता है।

 

 

 

स्वास्थ्य खराब होने पर किडनी कैसे प्रभावित होती है

 

 

डायबिटीज

 

कुछ लोगों में किडनी फैलियर का यह प्रमुख कारण हो सकता है। शरीर के कुछ अंगों की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टर को डायबिटीज से नुकसान पहुँचता है। इससे उन्हें आपके खून को साफ करने में परेशानी होती है। आपका शरीर जितना चाहिए उससे अधिक नमक और पानी आपके शरीर में जमा करने लगता है। इसकी वजह से आपके शरीर में अधिक अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं।

 

 

 

उच्च रक्त चाप

 

यदि आपके शरीर में रक्त प्रवाह बहुत अधिक होता है, तो यह आपके किडनी में रक्त सहित रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर सकता है। उच्च रक्त चाप आपको और भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को पैदा करता है। ये आपके दिल के लिए भी खतरनाक होता है।

 

 

 

उच्च कोलेस्ट्रॉल

 

यदि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो इसके पीछे आपका गलता खान पान ही जिम्मेदार है। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से उन वाहिकाओं का निर्माण होता है जो रक्त को आपके गुर्दे से बाहर ले जाते हैं। इससे आपको उच्च रक्तचाप और मधुमेह होने की अधिक संभावना है। आप अपने रक्त  की जाँच से इसका पता कर सकते हैं।

 

 

 

वस्क्युलिटिस (ANCA Vasculitis)

 

यह तब होता है जब आपके स्वयं के एंटीबॉडी – जो आमतौर पर कीटाणुओं से लड़ते हैं वह आपके गुर्दे और अन्य अंगों में छोटी रक्त वाहिकाओं पर हमला करती हैं। यह आपके पेशाब में रक्त और प्रोटीन को बनाने का काम कर सकता है और यह किडनी फैलियर का कारण बन सकता है। आपको बुखार, शरीर में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और भूरे रंग का पेशाब हो सकता है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरुरत है।

 

 

 

यूरिन ब्लॉकेज

 

यदि आप पेशाब आने पर पेशाब नहीं करते हैं, तो आपके किडनी को खराब कर सकता है। यह आपकी किडनी और आपके शरीर के अन्य हिस्सों में दबाव और संक्रमण का कारण बन सकता है। प्रोस्टेट कैंसर, गुर्दे की पथरी, मूत्राशय के कैंसर, मूत्र पथ के रक्त के थक्के, और पेट के कैंसर ऐसी कुछ चीजें हैं जो इसका कारण बन सकती हैं।

 

 

 

खून के थक्के बनना

 

ऐसी कई स्थितियों से रक्त के थक्के बन सकते हैं, लेकिन एक रक्त विकार – थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा (thrombotic thrombocytopenic purpura) – आमतौर पर गुर्दे की समस्याओं से जुड़ा होता है। यह छोटे रक्त वाहिकाओं में थक्के का कारण बनता है जो आपके मस्तिष्क और हृदय को भी प्रभावित कर सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, आपकी नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव, दस्त, सीने में दर्द, सिरदर्द, उबकाई और बहुत अधिक थकान महसूस होती है। यह गंभीर हो सकता है।

 

 

अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है तो इसका जल्दी से इलाज किया जाना चाहिए, ऐसे में आप हमारे डॉक्टर से सलाह लें सकते हैं। आपकी जरा सी लापरवाही आपके आपके पूरे स्वास्थ्य के साथ किडनी पर भी बुरा असर डालती है।


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