गर्भाशय में सूजन के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

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गर्भाशय (Uterus) को आमतौर पर महिला की कोख या बच्चेदानी (woman’s womb) के नाम से भी जाना जाता है। औसतन महिला के गर्भाशय का आकार 2.5 इंच से 3-4 इंच का होता है। गर्भाशय का आकार और आयाम (dimensions) नीचे से ऊपर तक नाशपाती जैसा होता है। गर्भाशय की सूजन या महिला के गर्भाशय में असामान्य रूप से वृद्धि प्रेगनेंसी और फाइब्रॉयड्स के कारण होता है। जैसे ही गर्भाशय में सूजन होती है महिला को पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होने लगता है और उलझन सी होने लगती है। हालांकि शुरूआत में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखायी देतें है। लेकिन गर्भाशय में सूजन पैदा होने के बाद महिला को तेज ब्लीडिंग शुरू हो जाती है और शरीर में काफी दर्द भी होता है। गर्भाशय में सूजन कई कारणों से होती है इसलिए जैसे-जैसे समय बीतता है, इसके लक्षण महसूस होने लगते हैं।

 

गर्भाशय में सूजन के कारण

 

आमतौर पर महिलाओं के गर्भाशय में सूजन तब होता है जिस वर्ष उसका मेनोपॉज होने वाला होता है। लेकिन गर्भधारण के समय भी महिलाओं के गर्भाशय में सूजन हो सकता है। इसके अलावा अन्य बहुत से कारणों से महिलाओं के गर्भाशय में सूजन होता है। आइये जानते हैं महिलाओं के गर्भाशय में सूजन के संभावित कारण क्या होते हैं।

 

गर्भाशय में सूजन के लक्षण

 

गर्भाशय के भौतिक आकार (physical size) में परिवर्तन होने के अलावा गर्भाशय में सूजन होने के अन्य कई लक्षण दिखायी देते हैं लेकिन आमतौर पर गर्भाशय में सूजन के लक्षण इसके कारणों पर ही निर्भर होते हैं। महिलाओं में गर्भाशय में सूजन होने के मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं।

 

  • महिलाओं को पेट में तीव्र ऐंठन (cramps) होना।

 

  • मासिक धर्म असामान्य होना यानि दर्द के साथ अधिक ब्लीडिंग होना।

 

  • पेट के निचले हिस्से में कुछ भारीपन महसूस होना।

 

  • मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने के कारण शरीर में खून की कमी (anemia) होना।

 

  • शरीर कमजोर होना और शरीर पीला पड़ना।

 

  • कमर के आसपास के हिस्सों (waistline) पर अधिक चर्बी जमना।

 

  • गर्भाशय पर अधिक दबाव पड़ना और इसके आकार में परिवर्तन दिखायी देना।

 

  • श्रोणि के आसपास (pelvic area) बहुत ज्यादा ऐंठन महसूस होना।

 

  • कब्ज बनना।

 

  • पैरों में दर्द, ऐंठन और सूजन होना।

 

  • पूरे शरीर में असामान्य दर्द महसूस होना।

 

  • बार-बार पेशाब महसूस होना।

 

  • योनि से पानी निकलना।

 

  • मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होना।

 

  • सेक्स के दौरान बहुत तेज दर्द होना।

 

  • मासिक धर्म के दौरान रक्त का जम जाना।

 

  • किसी भी समय ब्लीडिंग शुरू हो जाना।

 

  • पेशाब करने में कठिनाई होना।

 

  • स्तन कोमल हो जाना।

 

  • मुंहासे होना और चेहरे पर बाल आना।

 

  • मोटापा तेजी से बढ़ना।

 

गर्भाशय की सूजन दूर करने के उपाय

 

अन्य समस्याओं की तरह गर्भाशय में सूजन होने की समस्या को भी घरेलू उपचारों के जरिए बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है। आइये जानते हैं गर्भाशय में सूजने को ठीक करने के लिए घरेलू उपचार क्या है।

 

 

सोया मिल्क का सेवन

 

सुबह नाश्ते से पहले एक चम्मच शहद के साथ दो से तीन चम्मच ताजा सोया मिल्क का सेवन करने से गर्भाशय की सूजन दूर हो जाता है। शहद में दर्द, सूजन और जलन कम करने का गुण पाया जाता है और यह गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स को कम करता है। तीन हफ्ते लगातार सोया मिल्क और शहद का सेवन करने से गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।

 

हल्दी दूध का सेवन

 

आधे चम्मच हल्दी पावडर को एक चम्मच शुद्ध देशी घी या मक्खन में फ्राई कर लें। इसके बाद इस हल्दी को एक गिलास दूध में मिलाएं और चार पांच किशमिश, दो चम्मच पीसा हुआ अखरोट और चार पांच बादाम के छोटे टुकड़े डालें और इस दूध को अच्छी तरह से उबालें। दो हफ्ते तक लगातार इन सामग्रियों को मिलाकर दूध का सेवन करने से गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।

 

अखरोट खाएं

 

गर्भाशय को स्वस्थ रखने और सूजन से बचाने के लिए शरीर को एक स्वस्थ फैट, इसेंशियल विटामिन और खनिज की जरूरत होती है। अखरोट में ओमेगा 3 सहित अन्य ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं जो गर्भाशय को स्वस्थ रखते हैं। अखरोट में एंटीइंफ्लैमेटरी गुण होता है इसलिए हफ्ते में तीन दिन एक महीने तक मुट्ठी भर अखरोट खाने से गर्भाशय की सूजन कम हो जाती है।

 

मुलैठी

 

गर्भाशय में तरल पदार्थों और श्लेष्म (mucus) का अधिक उत्पादन होने से गर्भाशय में सूजन आ जाती है। मुलैठी श्लेष्म पैदा करने वाली ग्रंथियों को बाधित करती है जिसके कारण गर्भाशय का सूजन ठीक हो जाती है। 50 ग्राम मुलैठी की लकड़ी को पीसकर पाउडर तैयार कर लें और एक कांच की बॉटल में रख लें। रोजाना एक चौथाई चम्मच पाउडर पानी के साथ एक महीने तक लगातार खाएं। गर्भाशय की सूजन खत्म हो जाएगा।

 

अलसी का सेवन

 

शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और गर्भाशय की सूजन को दूर करने में अलसी के बीज बहुत फायदेमंद होते हैं। अलसी के बीज में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है जो शरीर के आंतरिक अंगों के सूजन को कम करने में मदद करता है। एक या दो चम्मच पीसी हुई मेथी को एक गिलास दूध में तब तक उबालें जबतक कि दूध आधा न हो जाए। इसके बाद दूध को ठंडा करके प्रतिदिन रात में सोने से पहले पीएं। ऐसा करने से गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाएगी।


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